जागरण संवाददाता, करनाल : राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में हिदी दिवस पर वर्चुअल संवाद कार्यक्रम के साथ मासिक राजभाषा हिंदी उल्लास पर्व आरंभ हुआ। इसके तहत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पूरे माह कई प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। संस्थान के निदेशक डा. एमएस चौहान पे अपनी अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि हिदी भारतवर्ष की राजभाषा और देश की सबसे अधिक बोली व समझी जाने वाली भाषा है। हिंदी का महत्व राजभाषा, संपर्क भाषा, वैश्विक भाषा तथा सरकारी काम में सरल भाषा के रूप में बढ़ रहा है। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली यह भाषा आज पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधने में सक्षम है। कल्याणकारी नीतियों व योजनाओं को सरलता से जन-जन तक पहुंचाने में हिदी का प्रमुख स्थान है। उन्होंने वैज्ञानिकों से शोध उपलब्धियों को किसानों, पशुपालकों व जनसामान्य के बीच सरल हिदी में प्रचारित करने के प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने सभी कर्मचारियों से सरकारी कामकाज हिदी में करने के लिए भी कहा। उन्होंने बल दिया कि नियमित कार्यों के अतिरिक्त राजभाषा प्रचार-प्रसार व कार्यान्वयन का दायित्व भी मन से स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष की हैसियत से केंद्र सरकार के समस्त कार्यालयों, बैंकों, उपक्रमों व शोध संस्थानों आदि कार्यालयों से आह्वान किया कि राजभाषा के प्रचार, प्रसार व कार्यान्वयन के लिए वर्ष भर सार्थक प्रयास करें। डा. कांता वर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कविताएं सुनाईं। संयुक्त निदेशक डा. आरआरबी सिंह, डा. धीर सिंह, वित्त नियंत्रक डीडी वर्मा, डा. प्रवीण कुमार, डा. ईश्वर गुप्ता, डा. आशुतोष, डा. अश्विनी राय, डा. संजीव सिंह, डा. चित्र नायक, डा. नितिन त्यागी, डा. नीलम उपाध्याय ने विचार रखे। संयुक्त निदेशक विवेक पुरवार व सभी प्रभागाध्यक्ष, प्रभारी, अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हुए। आभार सहायक निदेशक राजभाषा राकेश कुमार कुशवाहा ने व्यक्त किया। सम्मानित होंगे विज्ञानी, अधिकारी व कर्मचारी

निदेशक डा. चौहान ने बताया कि कोविड-19 संबंधी निर्देशों की दृढ़तापूर्वक अनुपालना के साथ संस्थान 13 अक्तूबर हिंदी उल्लास पर्व मनाएगा। वैज्ञानियों व हर संवर्ग के अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए विविध गतिविधियों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। पूरे वर्ष राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानियों, अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा।

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