हरियाणा के सरकारी स्कूलों में खेल मैदानों का होगा कायाकल्प, मिलेंगे एक-एक लाख रुपये
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने प्रत्येक स्कूल को एक-एक लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है।
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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में खेल मैदानों का होगा कायाकल्प (फाइल फोटो)
HighLights
प्रत्येक सरकारी स्कूल को मिलेगा एक लाख रुपये।
खेल मैदान विकास और उपकरण खरीद पर खर्च।
31 दिसंबर 2026 तक राशि खर्च करनी होगी।
विशाल कौशिक, करनाल। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाओं को मजबूत करने और विद्यार्थियों को बेहतर खेल मैदान उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के प्रत्येक सरकारी स्कूल को खेल मैदान के विकास और खेल उपकरणों की खरीद के लिए एक-एक लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। राशि के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी निर्धारित की है।
इसके तहत स्कूलों को तय नियमों के अनुसार राशि खर्च करनी होगी और खर्च का पूरा रिकार्ड रखना होगा। विभाग की इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में खेल मैदानों की स्थिति सुधारना, शारीरिक शिक्षा की सुविधाओं को बेहतर बनाना और विद्यार्थियों को विभिन्न खेलों के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराना है।
जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के सभी सरकारी स्कूलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराएं। स्कूलों को खर्च की गई राशि का मदवार ब्योरा तैयार करना होगा। खेल मैदान के विकास कार्य से पहले और बाद की तस्वीरें सुरक्षित रखनी होंगी।
मैदान समतल करने से लेकर खेल उपकरण खरीदने तक खर्च होगी राशि
जारी एसओपी के अनुसार, स्कूलों को मिलने वाली राशि का इस्तेमाल खेल मैदान के विकास, समतलीकरण और मार्किंग के लिए किया जा सकेगा। मैदान में मिट्टी भराई पर स्वीकृत राशि का अधिकतम 50 प्रतिशत ही खर्च किया जा सकेगा। इसके अलावा इनडोर और आउटडोर खेलों के लिए जरूरी उपकरण खरीदे जा सकेंगे। खेल सुविधाओं से संबंधित छोटी-मोटी मरम्मत, जैसे नेट, पोल और मैदान की सीमा चिह्नित करने से जुड़े कार्य भी इस राशि से कराए जा सकेंगे।
31 दिसंबर तक खर्च करनी होगी राशि
शिक्षा विभाग ने राशि खर्च करने और उसका हिसाब प्रस्तुत करने के लिए समयसीमा भी तय की है। एसओपी के अनुसार, स्कूलों को 31 दिसंबर 2026 तक स्वीकृत राशि का उपयोग करना होगा। इसके बाद 31 जनवरी 2027 तक उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) जमा करना अनिवार्य होगा।
आधे स्कूलों का होगा सत्यापन, गड़बड़ी पर रहेगी नजर
राशि के सही इस्तेमाल की निगरानी के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। स्कूल के प्रधानाचार्य या मुखिया को स्वीकृत योजना के अनुसार खर्च और रिकार्ड के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसएमसी या एसएमडीसी खर्च की योजना को मंजूरी देने और राशि का उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगी।
अधिकारियों को करनी होगी रैंडम जांच
खंड शिक्षा अधिकारी को अपने क्षेत्र के 50 प्रतिशत स्कूलों में औचक निरीक्षण कर राशि के उपयोग का सत्यापन करना होगा। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) जिले के 10 प्रतिशत स्कूलों का रैंडम सत्यापन करेंगे। सभी स्कूलों से प्राप्त उपयोगिता प्रमाणपत्रों को संकलित कर निदेशालय को भेजने की जिम्मेदारी भी जिला शिक्षा अधिकारियों की होगी।
