संवाद सहयोगी, घरौंडा : बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों का धरना और लंगर रविवार से फिर से शुरू हो गया। इसके साथ ही सात किसान क्रमिक भूख हड़ताल पर भी बैठ गए। 27 जनवरी को यहां से धरना और लंगर व्यवस्था को समाप्त करवा दिया गया था। किसानों ने शनिवार को ऐलान कर दिया था कि वह दोबारा से यहीं पर धरना और लंगर चलाएंगे। लिहाजा रविवार से पुराने स्थल पर ही धरना शुरू कर दिया गया। जबकि लंगर व्यवस्था भी शुरू कर दी गई।

बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसान लगातार डटे हैं। उन्होंने बसताड़ा टोल प्लाजा पर धरना समाप्त होने के बाद महिला कॉलेज रोड पर 29 जनवरी से धरना शुरू कर दिया था। यह स्थल बसताड़ा टोल प्लाजा से करीब 500 मीटर दूर था। शुक्रवार को बसताड़ा टोल प्लाजा पर आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच कई घंटे तक चली गहमागहमी के बाद किसानों को धरना प्रदर्शन की अनुमति मिली थी। किसी तरह की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए भारी पुलिस बल टोल पर तैनात रहा। अधिकारी लगातार बसताड़ा टोल प्लाजा की स्थिति का जायजा ले रहे

हैं।

तय घोषणा के अनुसार किसानों ने रविवार को टोल पर ही अपना धरना देकर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कऱ दी है। क्रमिक भूख हड़ताल पर सात किसान बैठे। इसके साथ ही लंगर व्यवस्था चलाने का इंतजाम भी किया जाने लगा है। दोपहर तक लंगर व्यवस्था चलाने के लिए सभी इंतजाम पूरे कर लिए गए और इसके बार व्यवस्थित ढंग से लंगर शुरू कर दिया गया। किसानों ने चेताया कि सरकार कितने भी हथकंडे अपना ले किसान अब डरने या झुकने वाला नहीं है। धरने पर आज पिछले दो दिनों से ज्यादा किसान पहुंचे और तीनों कृषि कानूनों को वापिस लेने के लिए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

टोल प्लाजा पर धरना प्रदर्शन कर किसान नेताओं ने कहा की सरकार किसानों के धरने को समाप्त करने के लिए ओछे हथकंडे अपना रही है। रविवार को क्रमिक भूख हड़ताल पर बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एडवोकेट चांदवीर मंढाण, राजेश लाठर, शमशेर बसताड़ा, गौरव पुनिया, विक्रम सिंह, पप्पू लाठर व सतबीर लाठर धरने पर बैठे। भाकियू प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य जगदीप सिंह ने कहा कि सरकार किसानों के आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है लेकिन ऐसा कभी नहीं हो सकता। किसानों की चेतावनी के अनुसार रविवार को सुबह बड़ी संख्या में किसान टोल पर पहुंचे और बसताड़ा टोल पर धरना व लंगर शुरू कर दिया।

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