प्रदीप शर्मा, करनाल

बिजली निगम जो भी नया बिजली कनेक्शन जारी करता है उससे पहले फिजिकल वैरीफिकेशन कर लोड की जांच नहीं करता। इसे निगम की लापरवाही समझकर उपभोक्ता फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। यानि घर का लोड चार किलोवाट का है तो उपभोक्ता मर्जी से दो किलोवाट का कनेक्शन अप्लाई कर देता है और उसे बिना किसी रूकावट के मिल भी जाता है। कनेक्शन मिलने के बाद इसके साइड इफेक्ट आने शुरू होते हैं। जिसको हम अनदेखा कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को यह समझना होगा कि जिस छोटे लालच में बिजली कनेक्शन चार की बजाय दो किलोवाट का लिया उसके बाद ओवरलोडिग पकड़े जाने पर बिजली निगम मोटा जुर्माना कर देता है। लाइट ट्रिपिग, ओवरलोडिग जैसी कई समस्याएं उपभोक्ताओं को ही झेलनी पड़ती हैं। हालांकि इसको निगम को भी लोस होता है। बिजली निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल

यह व्यवस्था बिजली निगम की कार्य प्रणाली को भी कटघरे में लाकर खड़ा करती हैं। क्योंकि कनेक्शन जारी करते समय फिजिकल वैरीफिकेशन हो तो यह मामले रूक सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं किया जाता। कनेक्शन जारी हो जाने के बाद ओवरलोडिग के मामले पकड़ने के लिए निगम की टीमें मुस्तैद रहती हैं। ऐसे में सवाल यह है उठता है कि आखिर ऐसा क्यों? जो समस्या पनपने से पहले ही दूर हो सकती है उसको फल-फूलने क्यों दिया जा रहा है? नही कराया गया फुट सर्वे, ओवरलोड होते हैं ट्रांसफार्मर

निगम की गाइड लाइन के अनुसार शहर में घरों की लोड की जांच करने के लिए या फिर नए कनेक्शन देने से पहले फुट सर्वे कराया जाता है। इस सर्वे में पता चल जाता है कि किस सब डिविजन पर कितना लोड है। उसके अनुसार ही ट्रांसफर क्षमता के अनुसार रखा जाता है। फुट सर्वे नहीं होने के कारण 30 प्रतिशत घटनाएं ट्रांसफर जल जाने तथा 45 प्रतिशत मामले ओवरलोडिग के सामने आते हैं। नियमानुसार 70 प्रतिशत से अधिक नहीं डाला जाता सकता लोड

नियम के मुताबिक किसी भी ट्रांसफार्मर को उसकी पूरी अवधि तक सेफ रखना है तो उस पर 70 प्रतिशत से अधिक लोड नहीं डाला जाना चाहिए। इससे अधिक लोड डालने से ट्रांसफार्मर खराब होने की संभावना बनी रहती है। जिले में जिस प्रकार से बिना फिजिकल वैरीफिकेशन के कनेक्शन जारी हो रहे हैं उससे जाहिर तौर पर ओवरलोडिग और ट्रांसफार्मर खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। जानिये उपभोक्ताओं को इसका नुकसान कैसे

1. ओवरलोडिग व लाइट ट्रिप

- हम 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की शर्त पर समय पर पूरा बिजली बिल अदा करते हैं। अब ऐसे में ओवरलोडिग की समस्या होगी तो लाइट ट्रिप करेगी। ट्रांसफार्मर जल गया तो उसके बदलने में भी समय लगेगा। 2. आर्थिक नुकसान

- मिनिमम मेंटेनेंस चार्ज से बचने के लिए हम कम किलोवाट का कनेक्शन तो ले लेते हैं, लेकिन जब ओवरलोडिग पकड़ी जाती है तो जितना पैसा आपने एमएमसी से बचाया होगा उससे कई गुणा भरना पड़ेगा। बिजली निगम पर असर : बढ़ानी पड़ी सब स्टेशन की क्षमता

नए कनेक्शन बढ़ने और वास्तविक लोड से कम किलोवाट के कनेक्शन लेने के कारण ओवरलोडिग के मामले बढ़े तो मजबूरन निगम को इसी साल 33 केवी सब स्टेशन सेक्टर-12, सेक्टर-छह, गढ़ीबीरबल, रामनगर, कैमला, मंजूरा, ओल्ड पावर हाउस, घीड़, ब्याना, बरसत, नगला मेघा, स्टौंडी, गुल्लरपुर, नलीपार, निगदू, बुड्ढनुपर, सीतामाई, सेक्टर-12, मधुबन, कालरम, सेक्टर-3, मेरठ रोड, कोहंड, कैमला, डाचर, नेवल, कुटेल, सिद्धपुर, मंजूरा, दरड़ व कालरों की क्षमता बढ़ानी पड़ी। निगम के मुताबिक क्षमता बढ़ाने के काम पर लगभग 24.81 करोड़ रुपये की राशि खर्च हुई थी। पीडीसी ओर एमएम की तरफ से जारी होते हैं निर्देश

बिजली निगम के (पीडीसी) प्लानिग एंड डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (एमएम) मैटीरियल मैनेजमेंट की तरफ से उपभोक्ताओं को संतोषजनक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस प्रकार के निर्देश जारी किए जाते हैं ताकि उन्हें दिक्कत ना आए। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि उनका पालन कितना होता है? नए कनेक्शन लेने का नियम क्या है?

आवेदक को अपना मकान या प्लाट की रजिस्ट्री की कॉपी, संबंधित व्यक्ति का आधार कार्ड, एक फोटो और फार्म भरकर आवेदन किया जाता है। राइट टू सर्विस एक्ट में सात दिन अंदर कनेक्शन देने का प्रावधान है। फोटो---33 नंबर है।

मीटर रीडिग के साथ मंगानी शुरू की ओवरलोडिग की डिटेल

बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता एसके चावला ने कहा कि कनेक्शन जारी करने से पहले फिजिकल वैरीफिकेशन नहीं कराई जाती। यदि उपभोक्ता का लोड चार या छह किलोवाट है और कनेक्शन दो किलोवाट का है तो ओवरलोडिग की डिटेल मीटर से पता चल जाती है। मीटर रीडिग के साथ अब हमने ओवरलोडिग की डिटेल भी मंगवानी शुरू कर दी है। जिसका लोड अधिक पाया जाता है उसको लोड बढ़ाने के लिए नोटिस जारी करते हैं। इसके बाद भी नहीं मानते तो कार्यवाही की जाती है।

Posted By: Jagran

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