जागरण संवाददाता, करनाल : वर्ष 2019 में बीते ढाई माह में आंकड़ों के खेल में डेंगू और मलेरिया पर स्वास्थ्य विभाग ने जीत हासिल कर ली है। बृहस्पतिवार को जिला मलेरिया वर्किग कमेटी की बैठक में बताया कि इस साल अब तक एक भी केस इन दोनों बीमारियों का नहीं आया है। अधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2017 में मलेरिया के केस 85, वर्ष 2018 में 17, जबकि इस वर्ष 28 फरवरी 2019 तक कोई केस नहीं है। इसी प्रकार वर्ष 2017 में डेंगू के 234, वर्ष 2018 में 106 केस थे।

जिला सचिवालय में सीटीएम सीटीएम नवीन अहुजा की अध्यक्षता में बैठक हुई। कार्यवाहक सिविल सर्जन डॉ. सरोज ने वैक्टर जनित बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू, जेई और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों की रोकथाम के लिए सहयोग मांगा। उपसिविल सर्जन डॉ. मंजू पाटक ने बताया कि आंकड़े दर्शाते हैं कि मलेरिया और डेंगू पर हम काफी हद तक नियंत्रित कर गए हैं। उन्होंने कहा कि डेंगू पर काबू पाने का एक मात्र साधन साफ-सफाई है क्योंकि डेंगू का मच्छर साफ पानी में ही पनपता है। जिले में 5 सीएचसी, 19 पीएचसी, 2 सब डिवीजनल अस्पताल व 146 सब-सेंटर हैं। इन सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया की दवाई मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती है। सभी स्वास्थ्य कर्मियों को हिदायत दी गई है कि वे यह सुनिश्चित करें कि मरीज दवाई का पूरा कोर्स करें। 2019 में जिले को मलेरिया मुक्त करना है। यमुना नदी होने के कारण करनाल जिला रेड जोन में आता है। लगभग 17 प्रतिशत जनता यमुना के किनारे बसती है। इन्हीं एरिया से मलेरिया के अधिकतर केस पाए जाते हैं। भविष्य के केस बढ़ने नहीं पाए, इसके लिए सभी विभागों का सहयोग होना बहुत जरूरी है। 25 को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस पर घरों में जाकर मलेरिया एवं डेंगू की रोकथाम के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा।

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के पास 7 फिश हैचरीज हैं। इसमें गंबुजिया मछली पाली जाती हैं जोमलेरिया पैदा करने वाले लारवा को खाती है।

इस दौरान उप सिविल सर्जन डॉ. राजेश गौरिया, डॉ. नीलम, डॉ. सिमी कपूर व डॉ. अन्नु मौजूद रहे।

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