संवाद सहयोगी, असंध : उपलाना वासी मनिदर का शव अमेरिका से 10 दिन में भारत आने की उम्मीद बन गई है। इसके लिए अमेरिका में रह रहे मनिदर के ममेरे भाई हरप्रीत के पास भारत से पावर आफ अटॉर्नी भेजी गई है। अब हरप्रीत वहां मामले की जांच में शामिल होकर मनिदर के शव को भारत भेजने में जुट गया है। वहीं मनिदर का शव लाने के लिए अभी तक लगभग 27 लाख 30 हजार रुपये की मदद आ चुकी है।

बता दें कि मनिदर पंजाब के रहने वाले कुलजिदर के स्टोर पर काम करता था। 22 फरवरी की रात को चोरी करने आए एक नीग्रो ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। अब स्टोर संचालक ने भी मनिदर का शव घर पहुंचाने के लिए आर्थिक सहायता करने का भरोसा दिया है। वहीं विदेशों में रह रहे भारतीयों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से परिवार की सहायता करने के लिए अभियान चलाया हुआ है। बच्चों को पापा का इंतजार, फोन पर बात करने की करते हैं जिद

ममा पापा जी का फोन क्यों नी आ रहा। मैनूं पापा नाल गल करणी सिगी। तुसी फोन मिलाकर दे दो ना..। ये शब्द मनिदर की बेटी सीरत ने रोते हुए कहे, जिनका परिवार का कोई भी सदस्य जवाब नहीं दे पा रहा है। इस दौरान घर में चारों और मातम का माहौल देख बच्चे अपने दादा को बार- बार पूछ रहे हैं- दादा जी क्यों रो रहे हो चुप हो जाओ। बच्चों की बात सुनकर पास बैठे बच्चों की दादी फफक-फफक कर रो पड़ती है। सरकार से मदद की गुहार

मनिदर के पिता जोगिदर सिंह रुंधे गले से कहते हैं कि बेटा तो चला गया। अगर सरकार सहायता करे तो बच्चे अपने पिता के अंतिम दर्शन कर लेंगे। बच्चों के सिर से पिता का साया भी उठ गया और घर की आर्थिक हालत पहले से भी ज्यादा ़खराब हो गई। अब बच्चों को पढ़ाने के भी लाले पड़ गए हैं। वह खुद टांग टूट जाने के चलते चारपाई पर हैं और परिवार चलाने के लिए कोई सहारा भी नहीं रहा।

Posted By: Jagran

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