जागरण संवाददाता, करनाल: शहर के निजी स्कूलों के अलावा प्ले-वे स्कूलों में बच्चों के दाखिलों के लिए संचालकों को इंतजार करना पड़ रहा है। अधिकतर स्कूलों में नवंबर से आवेदन स्वीकार करने शुरू कर दिए जाते थे, लेकिन जनवरी आधा बीत जाने के बाद भी अभिभावक अपने नौनिहालों को घर से बाहर निकालने से परहेज कर रहे हैं। जिले में तकरीबन 90 से अधिक प्ले-वे स्कूल चल रहे हैं, जिसमें कोरोना के कारण अभिभावक बच्चों को भेजने से परहेज कर रहे हैं। अभिभावकों की सुस्ती के पीछे कहीं न कहीं कोरोना का डर बैठा है।

इसी तरह निजी स्कूलों में भी बच्चों के दाखिलों में कमी आई है। सेक्टर-13 स्थित एक निजी स्कूल संचालक ने बताया कि प्रत्येक वर्ष नवंबर से ही अभिभावक अपने बच्चे का दाखिला करवाने के लिए पूछताछ शुरू कर देते थे और स्कूल भी जनवरी तक लगभग एलकेजी कक्षाओं के लिए सीट फुल हो जाती थी। इसी तरह, रेलवे रोड स्थित निजी स्कूल में भी अभी तक केवल 12 दाखिले हो पाए हैं।

अभिभावक मन्नत मुंजाल का कहना है कि उनकी बेटी तीन वर्ष की हो गई है और स्कूल भेजने की योजना बनाई थी, लेकिन कोरोना के कारण अभी दाखिले को लंबित कर दिया है। बेशक, कोरोना संकट के चलते फिलहाल सभी बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन में दिक्कत और कोविड-19 को देखते हुए स्कूल संचालकों को आवेदन की तिथि बढ़ानी पड़ रही है। स्कूलों में दाखिलों के लिए बनाई गई हेल्प डेस्क पर इक्का-दुक्का अभिभावक ही पूछताछ के लिए पहुंचते हैं।

निजी स्कूलों के जिला अध्यक्ष राजन लांबा ने बताया कि कोरोना के कारण शुरुआती कक्षाओं में स्कूलों के दाखिलों पर असर पड़ा है। अपने स्तर पर सभी स्कूल प्रबंधन दाखिलों का प्रयास कर रहे हैं। कोरोना वैक्सीन आने के बाद स्कूलों में जल्द कक्षाएं लग सकेंगी। फिलहाल वार्षिक परीक्षा की तैयारियां की जा रही हैं।

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