जागरण संवाददाता, करनाल

कंप्यूटर लैब सहायक अपने रोजगार को सुरक्षित करवाने के लिए मंत्रियों और विधायकों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। लैब सहायकों का कहना है कि रोजगार पॉलिसी बनाकर उनका रोजगार सुरक्षित किया जाए। टुकड़ों में रोजगार मिलने से वह भारी परेशानी में हैं। रविवार को राज्य मंत्री कर्णदेव कंबोज को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर राजेश पाढा ने कहा कि वर्ष 2011 में एक नियमित प्रक्रिया के तहत एक सरकारी एजेंसी सीडेक मोहाली द्वारा लिखित परीक्षा के आधार पर विभाग की देखरेख में मेरिट के अनुसार लैब सहायकों की नियुक्ति की गई थी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने भी लैब सहायकों के पक्ष में फैसला सुनाया है, लेकिन हरियाणा सरकार इन लैब सहायकों को टुकड़ों में रोजगार देकर उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। लैब सहायकों को वेतन के नाम पर केवल नौ हजार रूपए दिए

जाते हैं और छुट्टियों का वेतन भी नहीं दिया जाता। ऐसे में उन्हें अपना घर चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनके रोजगार को गेस्ट टीचर्स की तर्ज पर सुरक्षित नहीं किया तो उन्हें मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी। इसके साथ ही उन्होंने कंप्यूटर लैब सहायकों को छुट्टियों का वेतन देने व वेतन ट्रेजरी के माध्यम से देने की मांग को भी प्रमुखता के साथ उठाया। इस मौके पर राजेश पाढ़ा, गुलाब, प्रदीप, गौरव, नीरज, सुरेश, कर्ण व सतीश मौजूद रहे। डिजीटल इंडिया का दावा कर रही सरकार

उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार डिजिटल इंडिया का दावा कर रही है, वहीं

दूसरी तरफ डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने वाले कंप्यूटर लैब सहायकों का

शोषण किया जा रहा है और बार-बार सरकार के नेताओं से मिलने के बावजूद उनकी

समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा।

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Posted By: Jagran