जागरण संवाददाता, करनाल : नागरिक अस्पताल व कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के नशा मुक्ति केंद्र पर ताला लटका हुआ है। अब तक मेडिकल कॉलेज में ओपीडी हो रही थी, लेकिन बीते मार्च से लाइसेंस रिन्यू नहीं कराया तो ओपीडी पूर्ण रूप से बंद हो चुकी है। जो मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में आ रहे हैं उनको नागरिक अस्पताल में भेजा जा रहा है। लेकिन लाइसेंस नहीं होने के कारण ओपीडी चालू नहीं हो पा रही है। हालांकि नागरिक अस्पताल प्रबंधन की तरफ से सेंटर के लिए जगह मुहैया करा दी गई है, लेकिन सिविल सर्जन के साथ तीन सदस्यीय कमेटी ने सेंटर का निरीक्षण करना है, जो अभी तक नहीं हो पाया है। लाइसेंस रिन्यू के लिए भी अभी तक कोई प्रयास नहीं हुए हैं।

रोजाना 70 से 80 मरीजों की होती थी ओपीडी, अब धक्के खा रहे

नशा मुक्ति केंद्र के लिए नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 80 मरीजों की ओपीडी होती थी, इसमें इंडोर भी थे। केसीजीएमसी ने जब नागरिक अस्पताल को टेकओवर किया उस समय यह लाइसेंस कॉलेज के नाम चला गया। उसके बाद इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। मार्च में लाइसेंस एक्सपायर हो गया, लेकिन रिन्यू नहीं कराया गया। इससे अब मरीज इलाज के लिए धक्के खा रहे हैं।

जिला समाज कल्याण विभाग को देना होता है लाइसेंस

नागरिक अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र के लिए लाइसेंस जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से दिया जाता है। हालांकि इसकी कमेटी के सदस्य तीन होते हैं, जिसमें सिविल सर्जन, कार्यकारी अभियंता पीडब्ल्यूडी ओर जिला समाज कल्याण अधिकारी स्वयं होते हैं। तीनों अधिकारियों के संयुक्त निरीक्षण के बाद लाइसेंस जारी होता है।

निजी में इलाज महंगा, सरकारी में हो नहीं रहा

निजी अस्पतालों में नशा मुक्ति का इलाज बहुत महंगा है। सामान्य तौर पर भी दवाईयां बाहर नहीं मिलती हैं। सरकारी अस्पताल में मरीजों को इलाज मिल नहीं पा रहा है, ऐसे में मरीज इलाज को धक्के खा रहे हैं।

सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने कहा डी एडिक्शन सेंटर चलाने के लिए मैनपावर की जरूरत होती है, वो हमारे पास नहीं है। बजट का भी अभाव है। इस बारे में डीजी हेल्थ को लिखा गया है। इसका लगातार फॉलोअप भी किया जा रहा है। आज भी रिमाइंडर डाला हुआ है। उम्मीद है जल्द इसका हल निकल जाएगा। हमारे पास संसाधन पूरे हो जाएंगे तो तुरंत शुरू हो जाएगा, विजिट का बड़ा इश्यू नहीं है।

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Posted By: Jagran

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