जागरण संवाददाता, करनाल : पराली का समाधान है समझदारी.. अभियान के तहत किसानों ने फसल अवेशष प्रबंधन की शपथ ली। इस दौरान किसानों ने खुद जागरूक होने के साथ-साथ साथियों को जागरूक करने की बात कही। किसानों इस बात से सहमत हुए कि पराली जलाने से वातावरण में प्रदूषण फैलता है और खेत में ही फसल अवशेष निस्तारण करना जरूरी है। किसानों के अनुसार फसल अवशेष प्रबंधन समय की मांग है और इसके लिए कृषि विभाग भी सहयोग कर रहा है। वातावरण होता है प्रदूषित : सतपाल

किसान सतपाल ने बताया कि धान के सीजन में अधिकतर किसान जल्दी बिजाई के लिए फसल अवशेष को आग के हवाले कर देते हैं जबकि ऐसा करने से वातावरण प्रदूषित होता है। आज का किसान जागरूक है और कृषि विभाग से फसल अवशेष प्रबंधन पर सहायता ले सकता है। फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसान जागरूक : शमशेर

किसान शमशेर ने बताया कि दैनिक जागरण द्वारा प्रत्येक वर्ष इस बारे में जागरूक किया जाना सराहनीय है। अभियान के तहत किसान भी जागरूक हुए हैं। भूमि की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने के लिए खेतों में आग लगाना गलत है। पर्यावरण प्रदूषित होने से बचाव : रामेश्वर

किसान रामेश्वर ने बताया कि अगर हर किसान पराली को आग न लगाएं। आग लगाने से धुआं सड़क पर आ जाता है, ऐसे में कई बार यह हादसों का कारण बन जाते हैं।

पराली को आग लगाना सरासर गलत : संजय

किसान संजय कुमार ने कहा कि पराली को आग लगाना सरासर गलत है। कृषि विभाग के सहयोग से आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर पराली को आसानी से जमीन में खत्म किया जा सकता है। पराली को आग लगाने से जमीन की पैदावार तो कम होती ही है व उससे मित्र कीड़े भी उस आग में जल जाते हैं।

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