संवाद सूत्र, कुंजपुरा: क्षेत्र के किसानों को कुछ समय बाद सोइंग टेस्टिंग लैब यानी मिट्टी परीक्षण जांच केंद्र की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इसके बाद किसानों को जिला मुख्यालय या अन्य कस्बे व क्षेत्र में इस कार्य के लिए जाने की जरूरत नहीं होगी।

इस लैब के भवन का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। लैब के अस्तित्व में आने के बाद मिट्टी के नमूनों की जांच इसी लैब में होगी। भूमि को अधिक उपजाऊ बनाने के लिए प्राकृतिक व रसायनिक फॉर्मूलों की जानकारी और सिफारिशें किसानों व भूमि मालिकों को यहीं से उपलब्ध हो सकेगी।

मिट्टी के नमूने जांचने के बाद किसान को बताया जाएगा कि उसके खेत में कौन से आवश्यक तत्व की कितनी कमी है। उस तत्व की कमी को पूरा करने के लिए कौन सा तरीका सही है। सूत्रों के अनुसार मिट्टी परीक्षण के दौरान भूमि में मौजूद आवश्यक तत्व की कमी मिलने पर उसे पूरा करने के लिए प्राकृतिक फार्मूले के तहत मूंग व ढेंचा आदि जबकि केमिकल फॉर्मूले के तहत रसायनिक खाद के उचित मात्रा में इस्तेमाल किये जाने की जानकारी दी जाती है। लैब में मिट्टी जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही भूमि की उपजाऊ शक्ति का पता चलने पर तय होता है कि कौन सा रसायनिक खाद कितनी मात्रा में डालने पर भूमि को अधिक उपजाऊ बनाया जा सकता है।

बता दें कि खंड कुंजपुरा क्षेत्र में करीब 30 गांव आते हैं जो इस तरह की स्थानीय सुविधा से अब तक वंचित रह रहे हैं। हालांकि कृषि विभाग से संबंधित विशेषज्ञों की टीम सूचना के आधार पर किसान के खेत में पहुंच कर मिट्टी के नमूने ले जाती है लेकिन इससे किसानों को कई तरह की परेशानी से दो-चार होना पड़ता है। पिछले दिनों बड़ागांव में इसी तरह की एक टीम ने मौके पर पहुंच तीन किसानों की भूमि के नमूने लिए थे। गौरतलब है कि बहरहाल जो सोइंग टेस्टिंग लैब निर्माणाधीन है, वह दूरभाष केंद्र परिसर में बनाई जा रही है । यह भूमि मार्केट कमेटी के अंतर्गत आती है। इस लैब के विधिवत रूप से शुरू होने के साथ ही क्षेत्र के किसानों को मिट्टी परीक्षण संबंधी कार्य की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।

Edited By: Jagran