प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सेक्टर सात स्थित सेवा केंद्र की ओर से प्रजापिता ब्रह्मबाबा का स्मृति दिवस मनाया गया जागरण संवाददाता, करनाल

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सेक्टर सात स्थित सेवा केंद्र की ओर से प्रजापिता ब्रह्मबाबा का स्मृति दिवस श्रद्धाभाव से मनाया गया। ब्रह्मबाबा के चरित्रों पर प्रकाश डालते हुए सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रेम दीदी ने कहा कि पिता श्री ब्रह्मबाबा गुणों की खान थे। उनके अंदर पवित्रता, सहनशीलता, निरंहकारिता, उदारता व विनम्रता आदि गुण दिखाई देते थे। परमात्मा शिव ने जब ब्रह्मा के शरीर रूपी रथ का आधार लिया तो ब्रह्मा ने अपना तन, मन, धन, जन सर्वस्व परमात्मा शिव पर समर्पण कर दिया। वह त्याग, तपस्या, सेवा की जीती जागती मूर्त थे। भक्ति मार्ग में उन्हें भागीरथ, नंदीगण व हुसैन के घोड़े के रूप में जाना जाता है। ब्रह्मा वत्सों पर उन्होंने इतना प्यार लुटाया कि कोई भी उन्हें भूल नहीं पाया। 18 जनवरी 1969 को उन्होंने अपनी नश्वर देह का त्याग कर संपूर्ण फरिश्ता रूप धारण कर संपूर्ण स्थित को प्राप्त किया। ब्रह्माकुमारी संगीता बहन ने कहा कि ब्रह्मबाबा कर्मयोगी थे। छोटे-छोटे काम भी वह अपने हाथ से करते और उस कर्म के माध्यम से बच्चों को कुछ न कुछ शिक्षा देकर बच्चों का गुणों से श्रृंगार करते रहे। ब्रह्मकुमारी शिखा बहन ने कहा कि कई राजाओं ने भी घर बाहर का त्याग कर संन्यास धारण किया, जिससे उनके तन व मन समाज की सेवा में सृजल हुआ, परंतु ब्रह्माबाबा ने अपना सारा धन भी ईश्वरीय सेवा में लगा दिया। माता विशन देवी ने भी ब्रह्मबाबा के अंग संग बीते अपने जीवन के अनुभवों को सबके साथ सांझा किया। एडवोकेट शांता रंगा तथा नंद लाल वर्मा ने गीत व कविता प्रस्तुत की। इस अवसर पर नरेंद्र गुप्ता, एचएल मल्होत्रा, एएन मलिक, जेआर कालरा, रूपनारायण चांदना, डीडी शर्मा, सुरेश गोयल, सुनील वालिया, सुलतान सिंह, महिद्र संधु, राजिद्र हांडा, ज्ञान सरदाना, सुनीता मदान, छवि चौधरी, सिमरण चौधरी, रविश, सतीश मेहता, सतीश ढींगड़ा, रितेश विज, ब्रह्माकुमारी सुमनर, शिविका, रशमी, आरती, विमल मेहता व शीनू मेहता मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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