धर्म सिंह करनाल

निर्मल कुटिया फ्लाईओवर पर बड़ा हादसा टल गया। लापरवाह कैंटर चालक ने हाईवे पर इतना गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाया कि यहां कई लोगों की मौत हो सकती थी। गनीमत रही कि पानीपत निवासी सुशील कुमार की गाड़ी की रफ्तार कम थी। कार तो खराब कैंटर से टकरा गई, लेकिन बड़ा हादसा बच गया। उनकी पत्नी सुदेश को हल्की चोट आई। बाद में खराब कैंटर और क्षतिग्रस्त कार को हाईवे से हटाया गया। रोड सेफ्टी विशेषज्ञ नवदीप असीजा का मानना है कि कैंटर चालक के खिलाफ लोगों की जान खतरे में डालने का मामला तो दर्ज होना ही चाहिए। क्योंकि हाईवे पर 60 फीसद हादसे इसी तरह की लापरवाही से हो रहे हैं।

पंक्चर होते ही हाईवे के बीच में खड़ा कर दिया कैंटर

कैंटर दिल्ली की ओर से अंबाला की ओर जा रहा था। लक्कड़ से लदे इस कैंटर का पिछला टायर पंक्चर हो गया। चालक ने कैंटर हाईवे के बीच खड़ा कर दिया। इस पर उसने न तो सड़क पर संकेतक लगाया, नहीं ऐसा कोई इंतजाम किया कि पीछे से आ रहे वाहन चालक को पता चल जाए कि आगे खराब वाहन खड़ा है। फ्लाईओवर होने की वजह से पीछे से आ रहे वाहन चालक को आगे की स्थिति का पता नहीं चल पाता। इस वजह से हादसा होने के शत-प्रतिशत चांस थे।

ऐसे बचा पानीपत का व्यापारी

सुशील ने बताया कि उन्हें भी आगे यह नहीं दिखाई दे रहा था कि खराब कैंटर खड़ा है या फिर चल रहा है, जैसे ही वह इसके नजदीक पहुंचे तो अचानक लगा कि यह तो खड़ा है। तब न तो ब्रेक ले सकते थे, क्योंकि पीछे से स्पीड में वाहन आ रहे थे। हाईवे होने की वजह से साइड में भी नहीं जा सकते थे। ऐसे में उनके सामने एक ही चारा था कि किसी तरह से कम से कम जगह से गाड़ी साइड से निकाली जाए। इसी क्रम में उनकी गाड़ी कैंटर से जा टकराई। रोड सेफ्टी विशेषज्ञ नवदीप असीजा ने बताया कि क्योंकि सुशील की गाड़ी की स्पीड कम थी, इसलिए वह इतनी तेजी से निर्णय ले सके, यदि स्पीड थोड़ी भी ज्यादा होती तो यहां हादसा हो जाता।

टोल कंपनी भी जिम्मेदार

जब भी हाईवे पर वाहन खराब होता है तो टोल कंपनी की भी जिम्मेदारी है कि वह तुरंत वाहन को हटाए। इसके साथ ही कंपनी के कर्मचारियों की यह भी ड्यूटी है कि वह खराब वाहन के आगे व पीछे संकेतक लगाए। जिससे वाहन चालकों को आगे की स्थिति का पता चलता रहे। यहां दिन के वक्त वाहन खराब हुआ, करीब एक घंटे तक वाहन हाईवे पर खड़ा रहा। इसके बाद भी वहां टोल कंपनी के कर्मचारी नहीं पहुंचे।

Posted By: Jagran