जागरण संवाददाता, करनाल : सिघड़ा स्थित नानकसर गुरुद्वारे के संत राम सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल हुए अनुयायियों के मन में पूरे प्रकरण को लेकर गहरा दुख और रोष झलका। उनका कहना है कि संत राम सिंह ने आखिर किन परिस्थितियों में इतना बड़ा कदम उठाया, इसे सामने लाया जाना चाहिए। भारतीय किसान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राजेंद्र आर्य दादूपुर सरीखे किसान नेताओं ने प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग उठाई तो पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश, किसान नेता गुरनाम चढूनी व कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र नरवाल आदि ने भी संत को नमन किया।

शुक्रवार को गुरुद्वारा परिसर में संत राम सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल हुए भारतीय किसान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राजेंद्र आर्य दादूपुर ने कहा कि संत राम सिंह का पूरा जीवन मानवता के प्रति समर्पित रहा। अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले ऐसे व्यक्तित्व ने इतना बड़ा कदम क्यों और किन परिस्थितियों में उठाया, इसकी पड़ताल होनी चाहिए। अगर उन्होंने वाकई खुद को गोली मारी है तो उनकी तुलना महान क्रांतिकारियों के बलिदान से की जानी चाहिए। लेकिन यदि उनकी मौत के इससे अलग कोई कारण हैं तो इसकी न्यायिक जांच कराई जाए ताकि वास्तविकता सबके सामने आ सके।

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश ने कहा कि संत महापुरुषों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाता। यह बहुत दुखद है कि संत राम सिंह ने इतना बड़ा कदम उठाया। इससे साबित हुआ है कि ऐसे महापुरुष सबके हितों की ही सोचते हैं। अब सबको संयम और शांति से काम लेना चाहिए। संत राम सिंह के गांव कोहला जिला गुरदासपुर पंजाब से आए सरजीत सिंह सोढ़ी ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को लेकर वह और उनके साथ आए गांव के अन्य लोग स्तब्ध हैं। किन परिस्थितियों में उन्होंने यह कदम उठाया, यह वाकई चितनीय है। इससे जुड़े तथ्य सामने आने चाहिए। इस दौरान मौजूद रछपाल सिंह, हजारा सिंह, जागर सिंह, बलकार सिंह, जरनैल सिंह, कुलवंत सिंह व मंगत सिह, असंध से आए चरणजीत सिंह और बलजीत, कांग्रेस नेता सुरेंद्र नरवाल सहित कश्मीर सिंह और गुरमीत सिंह ने भी संत राम सिंह के बलिदान को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि संगत को संयम रखते हुए इसके वास्तविक कारण सामने आने का इंतजार करना चाहिए।

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