संवाद सहयोगी, असंध : सालवन गांव स्थित माता मनसा देवी मंदिर में दुर्गा अष्टमी के पावन पर्व पर श्रद्धा उमड़ती है। श्रद्धालु मां के चरणों में नतमस्तक होकर मनोकामनाएं मांगते हैं। प्राचीन काल से ही यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु अष्टमी के दिन आयोजित होने वाले मेले में मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। मनोकामना पूर्ण करने वाली माता मनसा देवी मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। समय के साथ ही मंदिर में निर्माण कार्य करवाया गया है और इसे भव्य रूप दिया गया। मंदिर के पुजारी महंत सुखदेव पुरी के सानिध्य में यहां त्यौहारों व पर्वो पर पूजा-अर्चना की जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने माता मनसा देवी की पूजा की थी और महाभारत युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए मां शक्ति की आराधना की। अश्विन व चैत्र मास के नवरात्र में सप्तमी के बाद अ‌र्द्ध रात्रि 12 बजकर एक मिनट पर शुरु होती है तो यहां प्रसाद चढ़ाकर पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए प्रसाद व मुद्रा में से गांव के राजपूत परिवार व पाण्डे सर्वप्रथम एक मुट्ठी प्रसाद व नकदी ग्रहण करते हैं। इसके बाद प्रसाद वितरित किया जाता है। यथा नाम तथा वरदान के अनुसार माता मनसा देवी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करती है। दुर्गाष्टमी के बाद गांव में कुश्ती दंगल का आयोजन किया जाता है। विजेता पहलवानों को ग्रामीणों की ओर से नकद पुरस्कार दिया जाता है।

22 अक्टूबर को मंदिर में आयोजित होने वाले मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस तैनात रहेगी। असंध के डीएसपी श्यामलाल शर्मा ने कहा कि मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।

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