जागरण संवाददाता, करनाल: जनवरी में हुई बारिश ने मानसून का अहसास करा दिया। क्षेत्र में पिछले तीन दिन से रुक-रुककर बारिश हो रही है। बुधवार अल सुबह तक बारिश के साथ कई जगह पर ओलावृष्टि भी हुई। 24 घंटे में 25.8 एमएम बारिश दर्ज की गई। इसके बाद न्यूनतम तापमान गिरावट के साथ 13.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह के समय नमी की मात्रा 100 फीसद दर्ज की गई। हवा 4.2 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली। बुधवार सुबह भी बादल छाये रहे। हालांकि कुछ देर के लिए सूर्यदेव के दर्शन तो हुए, लेकिन एक घंटे के अंदर ही बादल फिर से छा गए। सूर्यदेव की लुकाछिपी का खेल चलता रहा। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के मुताबिक आने वाले 24 घंटे में धुंध छा सकती है। धुंध का यह सिलसिला लगातार कई दिन तक जारी रह सकता है। जनवरी में हर साल होती रही है बरसात

मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि हर साल जनवरी में बारिश होती रही है, लेकिन यह मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करता है कि किस दिन बारिश होगी। पिछले 10 साल पर नजर दौड़ाई जाए तो आंकड़े सब बयां करेंगे। वर्ष बारिश

2010 7.6 मिलिमीटर

2011 2.2

2012 21.6

2013 64.4

2014 65.2

2015 15.0

2016 0.0,

2017 93.8

2018 34.2

2019 28.8

2020 36.2 घबराएं नहीं किसान, मुफीद है बारिश फोटो 27

संस, इंद्री: बीती रात बारिश गेहूं और ईख की फसल के लिए फायदेमंद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दिनों बारिश फसल में खाद का काम करेगी।

गौरतलब है कि बीती रात तेज हवा के साथ बारिश हुई, जिससे क्षेत्र में कई जगह ईख की फसल खराब हुई। जिन किसानों ने गेहूं की फसल में पहले से ही पानी दिया हुआ था, ऐसे खेत पानी से लबालब हो गए। यदि गेहूं या सब्जी की फसल में लंबे समय तक पानी ठहर गया तो फसल खराब होने की आशंका रहेगी। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेज बारिश हुई सब्जी खराब हो सकती है ।

खंड कृषि अधिकारी अश्विनी कुमार का कहना है कि बारिश गेहूं और ईख के लिए फायदे मंद है। बारिश के पानी में नाइट्रोजन होती है, जिससे फसल को लाभ होता है। जिस खेत में चिकनी मिट्टी है, उस खेत में कुछ नुकसान होने की संभावना रहती है। आजकल वैसे भी गेहूं की फसल में पानी देने का समय था, इसलिए इस बारिश से फसल को फायदा ही होगा।

Edited By: Jagran