जागरण संवाददाता, कैथल : भारत सरकार के कैबिनेट सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा ने कहा कि विभिन्न विभाग आपसी तालमेल से जल संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम उठाएं, ताकि गिरते भूमि जल स्तर में सुधार किया जा सके। जल शक्ति अभियान के तहत एक जुलाई से जल संचयन तथा जल बचाने के लिए विशेष कार्य किए जाए। इस कार्य में सरकारी विभागों के साथ सामाजिक संस्थाओं तथा आम जन को भी जोड़ा जाए, ताकि इस अभियान को एक जन आंदोलन का रूप देकर भूमि जल स्तर को दुरूस्त किया जा सके।

सिन्हा वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिव तथा जिला उपायुक्तों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले सभी तालाबों की सफाई व खुदाई कर ली जाए, ताकि बरसात के पानी को संचित किया जा सके।

खंड स्तर तथा जिला स्तर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए, ताकि आम जन जल के महत्व को समझकर उसे व्यर्थ न बहाए तथा जल का सद्पयोग करें। जल शक्ति अभियान में नहरी विभाग, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, पंचायती विभाग आदि आपसी तालमेल से कार्य करें। इस विशेष अभियान में नेहरू युवा केंद्र, स्कूल व कॉलेज के विद्यार्थी तथा विभिन्न संस्थाओं को शामिल किया जाए।

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पानी एकत्रित को लेकर तालाबों

की करवाएं सफाई : ढेसी

इस दौरान हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने डीसी को निर्देश दिए कि जल शक्ति अभियान के तहत विशेष कार्य किए जाने सुनिश्चित किए जाए। इसके तहत सभी संबंधित विभाग मिलकर कार्य करें। पानी का संचय करने के लिए जितने भी तालाब है, उन सभी की सफाई करके उसकी क्षमता में वृद्धि की जाए। उन्होने कहा कि प्रदेश में 16 हजार 500 पौंड में से 4 हजार पौंडस को सीधा नहरों से जोड़ा गया है। मानसून सीजन में ज्यादा से ज्यादा पौधा रोपण किया जाए। कृषि विभाग दिए गए डीएसआर, मक्का बिजाई के लक्ष्य को पूरा करना सुनिश्चित करें। कहा कि मक्का लगाने के लिए किसान 5 जुलाई तक आफलाइन आवेदन दे सकते हैं।

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जल संरक्षण को लेकर प्रशासन जागरूक : डीसी

डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने कहा कि जिला में जल संरक्षण की दिशा में अनेक कदम उठाए जा रहे हैं। जल ही जीवन है, धान की सीधी बिजाई, प्रति बूंद-अधिक फसल आदि अभियानों के तहत आम जन को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। जिला में 7 हजार 169 हैक्टेयर भूमि पर मक्का की बिजाई होगी, इसके साथ 5 हजार हैक्टेयर में सीधी बिजाई की जाएगी। जिला में 25 यूनिट माइक्रो इरीगेशन के तहत चल रही है, जिससे जल संरक्षण हो रहा है। नहरों की सफाई के साथ-साथ 53 तालाबों को साफ किया जा चुका है तथा 10 तालाबों की क्षमता में वृद्धि करने के लिए कार्य किया जा रहा है। 5 गांव चंदाना, कठवाड़, मांझला, कुराड़ व सिणद में 5 पौंड सिस्टम से निकलने वाले पानी को कृषि कार्यों में उपयोग में लाया जा रहा है।

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Posted By: Jagran

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