जागरण संवाददाता, कैथल : डीसी प्रदीप दहिया ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा समाज से जाति-पाति का भेदभाव मिटाने और आपसी सौहार्द को बनाए रखने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता अंतरजातीय विवाह योजना चलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत अब अंतरजातीय विवाह करने पर शादीशुदा जोड़े को 2 लाख 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा दी जाती है। इसमें 1 लाख 25 हजार रुपये की राशि लाभार्थियों को सीधे उनके संयुक्त बैंक खाते में तथा 1 लाख 25 हजार रुपये तीन वर्ष के लिए सावधि जमा (एफडी) स्वरूप दी जाती है। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसी भी लड़का या लड़की में से एक का संबंध अनुसूचित जाति से होना जरूरी है अर्थात विवाह करने वाले दंपत्ती में एक अनुसूचित जाति और दूसरा गैर-अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाला होना चाहिए। लाभार्थी विवाह की तिथि से तीन साल तक आवेदन कर सकते हैं। अंतरजातीय विवाह योजना की पात्रता शर्ते

विवाह के लिए आवेदन करने वाले जोड़े में लड़का या लड़की (जोकि अनुसूचित जाति के हों) को हरियाणा का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। इस योजना के तहत लाभ सिर्फ उस जोड़े या दंपती को मिलेगा जिनमें एक व्यक्ति दलित और दूसरा स्वर्ण जाति का होगा। अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपती का यह पहला विवाह होना चाहिए अन्यथा वे इस योजना के तहत लाभ के पात्र नहीं होंगे, ये पति-पत्नी दोनों पर ही शर्त लागू होगा। अगर दोनों में से किसी की भी पहले शादी हो चुकी है तो वे योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। दंपती का विवाह अंतरजातीय विवाह हिदू विवाह अधिनियम के तहत पंजीकृत होना चाहिए तथा विवाह करने वाले जोड़े में से युवक की उम्र 21 वर्ष या उस से अधिक व युवती की उम्र 18 वर्ष या उस से अधिक होनी चाहिए।

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