जागरण संवाददाता, कैथल : गर्मी का सीजन शुरू होते ही मलेरिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्यकर्मियों व सक्षम युवाओं की टीम घर-घर दस्तक दे रही है। शहर व गांव के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है जो घरों में जाकर लार्वे की जांच कर रहे हैं। पानी की टंकियों, हौदियों, कूलर व पानी के अन्य बर्तनों में लार्वा है या नहीं, इसे लेकर सर्वे हो रहा है। अब तक 15 हजार के करीब घरों का दौरा किया जा चुका है। एक अप्रैल से अभियान की शुरूआत हुई थी। पूरे जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की टीम भी सर्वे कर रही है। वर्ष 2022 तक जिले को मलेरिया मुक्त करने का लक्ष्य विभाग ने रखा हुआ है। पिछले तीन सालों से एक भी केस मलेरिया का सामने नहीं आया है।

जिला मलेरिया अधिकारी डिप्टी सिविल सर्जन डा. नीरज मंगला ने बताया कि कोरोना महामारी के साथ-साथ मलेरिया को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए हेल्थ वर्कर, समक्ष युवा, आशा व आंगनबाड़ी वर्करों को शामिल किया गया है। सामाजिक संस्थाओं, ग्राम पंचायतों और वार्ड प्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जा रहा है। लोगों से अपील है कि मलेरिया से बचाव को लेकर सतर्क रहें। घरों के आसपास खड़े पानी में काला तेल डालें। मिट्टी से उस जगह को भर दें। घरों में इस्तेमाल किए जाने वाले पानी के बर्तनों की नियमित रूप से सफाई करें। खेतों में पानी की हौदियों को भी साफ-सुथरा रखें। खड़े पानी में मलेरिया का मच्छर पैदा होता है, इसलिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जहां मलेरिया का लार्वा मिल रहा है, वहां दवाई डालकर उसे नष्ट किया जा रहा है। बार-बार उसी स्थान पर लारवा मिलने के बाद संबंधित बिल्डिंग मालिकों को नोटिस भी जारी किया जा रहा है।

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