जागरण संवाददाता, कैथल : बालू गांव के सरकारी स्कूल में आदेशों के बावजूद कमरों का निर्माण न होने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकार के चीफ सेक्रेटरी से जवाब मांगा है। कहा है कि शिक्षा के अधिकार को लेकर शिक्षा विभाग गंभीर क्यों नहीं है? बच्चो के पढ़ाई के लिए बनाए गए 15 कमरों को गिराकर उनके स्थान पर केवल 5 कमरे ही बनाने को लेकर चीफ सक्रेटरी से जवाब मांगा है। इसके साथ कोर्ट ने चीफ सक्रेटरी को आदेश दिए की वे कागजी कार्रवाई के अलावा स्कूल प्रिसिपल को बुलाकर स्कूल की समस्याओं पर जानकारी हासिल करें।

हाई कोर्ट में छात्रों के वकील प्रदीप रापड़िया ने कहा कि कैथल जिला प्रशासन ने भी कोर्ट के आदेशों की कोई परवाह नहीं की, जिस कारण स्कूल बद से बदतर होता चला गया। रापड़िया ने बताया कि अव्यवस्था के चलते स्कूल में न तो पीने के लिए साफ पानी होता है, न ही टॉयलेट और बैठने के लिए कमरे हैं। न्यायालय में शिक्षा के अधिकार की मांग हुई तो स्कूल के 15 कमरों को गिराकर मात्र पांच कमरों का निर्माण कर दिया जाता है। यह है मामला :

गांव बालू के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले सात छात्रों ने स्कूल की जर्जर इमारत व शिक्षकों की कमी को लेकर चंडीगढ़ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कक्षा छठी से दसवीं तक के सात छात्र अमरजीत, अभिषेक, सौरभ, अजय, मंदीप, सावन, विकास ने स्कूल की दयनीय स्थिति की जानकारी दी। इस मामले पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सरकार को नोटिस जारी किया। उसके बाद स्कूल में पांच कमरों का निर्माण हुआ। स्कूल में वर्तमान में यह है स्थिति :

वर्तमान में इस सत्र में स्कूल में कक्षा 6वीं से लेकर 12वीं तक कुल 450 बच्चे पढ़ रहे है जिन्हें 11 सेक्शन में बांटा गया है, लेकिन अब बच्चों को बैठाने के लिए कुल पांच कमरे ही बचे हैं, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी बच्चों के बैठने की समस्या बरकरार है, विज्ञान की प्रयोगशाला की बात तो दूर, इस स्कूल में कई गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं और बालू गांव की आबादी भी 18 हजार से ज्यादा है, ऐसे में बच्चों के सामने अन्य विकल्प बहुत अधिक नहीं है यहां सिर्फ दसवीं तक विज्ञान की पढ़ाई करवाई जाती है।

Posted By: Jagran

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