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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 04, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हरियाणवी संगीत की समझ ज्यादातर कलाकारों में नहीं : गजेंद्र फौगाट

By JagranEdited By:
Published: Mon, 04 Mar 2019 10:12 AM (IST)

बॉलीवुड और हरियाणावी गायक गजेंद्र फौगाट ने वर्तमान में तेजी से आगे बढ़ रही हरियाणवी गायकी को पागल हाथी की ...और पढ़ें

हरियाणवी संगीत की समझ ज्यादातर कलाकारों में नहीं : गजेंद्र फौगाट
हरियाणवी संगीत की समझ ज्यादातर कलाकारों में नहीं : गजेंद्र फौगाट

विक्रम पूनिया, कैथल : बॉलीवुड और हरियाणावी गायक गजेंद्र फौगाट ने वर्तमान में तेजी से आगे बढ़ रही हरियाणवी गायकी को पागल हाथी की तरह करार दिया है। हरियाणा में इस समय कलाकारों की बाढ़ सी आई हुई है। उनका मानना है कि हरियाणवी संगीत की समझ वर्तमान में ज्यादातर कलाकारों को नहीं है। ज्यादातर लोग बिना सीखे गायकी के क्षेत्र में आ गए हैं जो हरियाणवी संगीत को गलत दिशा में लेकर जा रहे हैं। हालांकि कुछ ऐसे लोग भी हैं जो कि लगाव और रियाज के बल पर ऐसा प्रदर्शन कर देते हैं जिसकी वजह से हरियाणा व हरियाणवी गायकी आज भी जिदा है।

फौगाट ने बताया कि वह बचपन से ही गाने का शौक रखते हैं और बास्केटबॉल के राष्ट्रीय खिलाड़ी भी रहे हैं। बता दें कि वर्तमान में गजेंद्र फौगाट ने हरियाणवी गायकी, अपनी हाजिर जवाबी, हुनर के दम पर देश ही नहीं विदेशों में भी लाखों प्रशंसक बनाए हैं। वे हरियाणवी बोली के दम पर लाखों लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं।

सवाल : नया गाना या कोई और बड़ा प्रोजेक्ट जिस पर काम कर रहे हैं?

जवाब : दो गाने उनके जल्द रिलीज होने वाले हैं। एक पांच मार्च को जर्मनी में रिलीज करेंगे बालमा पावरफुल व उसके बाद एक गाना होली पर उनका आ रहा है। इसके अलावा सतीश कौशिक एक फिल्म म्हारी छौरी के छौरों से कम हैं बना रहे हैं उसमें भी उनका एक गाना है जो बहुत जल्द सुनने को मिल जाएगा। इसके अलावा कुछ बड़े प्रोजेक्ट में भी काम कर रहा हूं जो सांझा नहीं कर सकता।

सवाल : हरियाणवी गायकी के स्तर को किस तरह देखते हैं?

जवाब : वे हरियाणवी की पारंपरिक गायकी को बहुत पसंद करते हैं। दो दशकों 1980 और 1990 में रागनी ने अपनी छाप छोड़ी, लेकिन बहुत जल्द संगीत की यह पॉपुलर विद्या दम तोड़ गई। इसके बाद सांग का दौरा आया और कुछ कलाकारों ने अच्छा सांग दिया जो आज भी लोगों के जेहन में जिदा है, लेकिन बाद में फूहड़ता के कारण इस विद्या का भी अंत हो गया। आज के युवक युवतियों को मोबाइल से फुर्सत नहीं है और नशे ने तो हरियाणा की हालत को बदतर कर दिया। बॉलीवुड में भी हरियाणा का असली रुप नहीं दिखाई देता है, लेकिन अब पहचान जरूर बनाई है। बॉलीवुड में हरियाणा बहुत पहले से है।

सवाल : बॉलीवुड में मौजूद हरियाणवी कलाकारों से किस तरह का सपोर्ट मिलता है?

जवाब : सतीश कौशिक, यशपाल शर्मा बहुत अच्छा काम कर रहे हैं हरियाणवी बोली के लिए, लेकिन रणदीप हुड्डा से वे बहुत खफा हैं। वे हरियाणवी बोली का इस्तेमाल अपनी फिल्मों में दर्शक जुटाने के लिए कर रहे हैं, लेकिन बोली को बढ़ावा देने के लिए नहीं। अब तक उनका सपोर्ट जीरो रहा है और वे मुंबई में रहकर मुंबई के ही हो गए हैं।

सवाल : हरियाणवी संगीत व सांस्कृतिक को बचाने के लिए क्या कर रहे हैं?

जवाब : वे हरियाणा कला परिषद के निदेशक हैं और कई कार्यक्रम करवाएं हैं हरियाणा लोक गायकी व संस्कृति को बचाने के लिए। फिर भी उनका मानना है कि विश्वविद्यालय और सरकारें इसके लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकती हैं। समाज को आगे आना होगा और खासकर युवक युवतियों जो नशे और स्मार्टफोन की आभासी दुनिया में खोये हैं। इन्हें हमारी पारंपरिक लोक गायकी व संस्कृति के बारे में ना सिर्फ बताना है, बल्कि आने वाली पीढि़यों को बचपन से ही इसके लिए तैयार करना होगा।