जागरण संवाददाता, कैथल : सनातन धर्म मंदिर में शिव पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर जमुना पूरी ने बताया कि शिव पुराण सुखी जीवन जीने की कला सिखाता है। कथा में मुख्यातिथि के तौर पर दिनेश अरोड़ा व कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्षद ज्योति सैनी ने की।

महाराज ने बताया कि भगवान शंकर का ना कोई जन्म का दिन है और न ही कोई मरण का दिन है। भगवान शंकर का अर्थ पूर्ण ब्रह्मांड है। आज भाई भाई से से वैर रखता है जब कि भगवान ने मानव जीवन प्रेम करने के लिए दिया है। सनातन धर्म विज्ञान पर आधारित है। शिवलिग पर माथा टेकने से हर भक्त में उर्जा का संचार होता है। सनातन धर्म में मंदिर में नंगे पांव प्रवेश करने का विधान बनाया ताकि धरती से मिलने वाली उर्जा भी मानव जीवन में चार चांद लगा सके।

कष्ट के बारे में उन्होंने बताया कि कष्ट कैसे आते हैं। भगवान राम को राज तिलक होना था लेकिन विधाता को मंजूर नहीं था, उन्हें वनवास जाना पड़ा। भगवान श्री कृष्ण जेल में ही पैदा हुए थे। वे छह दिन के ही थे जब पूतना उन्हें मारने के लिए आई थी। 11 साल की आयु में मामा कंस का वध करना पड़ा था। अगर हम भगवान कृष्ण व राम की प्रतिमा देखते हैं तो उनमें भी भगवान हंसते हुए दिखाई देते हैं। हमें भी हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए और परिवार से मिल कर रहना चाहिए।

ये रहे कथा में मौजूद

इस मौके पर मुख्य रूप से रवि भूषण गर्ग, श्याम सुंदर बंसल, सुभाष गोयल, इंद्र बंसल, मणी सिक्का, सुरेंद्र गर्ग, सुरेंद्र गर्ग, पवन गर्ग, रवि मित्तल, चंद्र प्रकाश, प्रेम सिगला, धर्मबीर कैमिस्ट, मुकेश कुमार, नरेश गर्ग, बाल मुकुंद, सुमीत कुमार, राकेश मित्तल, रमेश बंसल, विनय, सुंदर लाल, भारत गर्ग, हिमांशु गर्ग, कृष्ण कुमार मौजूद थे। --------------

Posted By: Jagran

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