जागरण संवाददाता, कैथल : आरकेएसडी महाविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान विभाग की ओर से सूचना के अधिकार पर एमए राजनीतिक विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर मंजूषा शर्मा ने दिया।

कॉलेज के राजनीतिक विभाग के अध्यक्ष डॉ.सीबी सैनी ने प्रोफेसर मंजूषा शर्मा के साथ-साथ सभागार में उपस्थितजनों का स्वागत किया। प्राचार्य डॉ.ओपी गर्ग ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक व प्रेरणादायक होते हैं। डॉ. मंजूषा शर्मा ने सूचना के अधिकार पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूचना का अधिकार लागू होने से प्रशासन में पारदर्शिता और समय पर कार्य होने की संस्कृति पैदा होती है। 1962 में चीन युद्ध के बाद जनता ने इस दिशा में सोचना शुरू कर दिया था। 1985 भोपाल गैस कांड के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि आप गैस का भंडारण कैसे होता है।

1990 में किसान शक्ति संगठन ने ग्रामीण क्षेत्र राजस्थान से सूचना मांगी कि सरकार मजदूरों को कितना पैसा दे रही हैं। इस तरह से 2004 में सरकार ने प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में सूचना के अधिकार के लिए संसदीय समीति का गठन किया। इस तरह 13 अक्टूबर 2005 को सूचना के अधिकार को लागू किया गया। हरियाणा में सूचना का अधिकार नियम 2009 में लागू किया गया। इस तरह कोई भी व्यक्ति किसी भी विभाग से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकता है। संबधित विभाग को यह जानकारी प्रार्थी को 30 दिनों के अंदर देनी होती है।

30 दिनों तक सूचना ना मिलने पर प्रार्थी दोबारा से सूचना मांग सकता है। इसके बाद भी सूचना ना मिलने पर राज्य अपीलीय प्राधिकरण को अपनी शिकायत भेज सकता हैं। जीवन से संबंधित शिकायत के लिए 48 घंटे में जबाव देना अनिवार्य होता हैं। मंच का संचालन डॉ. सुरेंद्र आर्य द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. श्रीओम, डॉ.अशोक अत्री, डॉ.सुदेश बंसल, डॉ.ओपी सैनी, प्रो. सीमा व राजनीतिक विज्ञान के विद्यार्थी उपस्थित रहें।

Posted By: Jagran

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