जागरण संवाददाता, कैथल : नगर परिषद में काम नहीं होने से शहर की जनता निराश होकर वापस लौट जाती है। अधिकारियों की कुर्सियां खाली पड़ी हैं। ना तो काम करवाने के लिए अधिकारी रहे और ना काम करने के लिए कर्मचारी।

मंगलवार को नप कार्यालय का दौरा किया तो सभी अधिकारियों की कुर्सियां हमेशा की तरह ही खाली मिली। आमजन परेशान हो वापस लौट रहा था। हालात इस कदर खराब हैं कि लोगों को शिकायत करने के लिए भी अधिकारी नहीं मिलता है। अधिकारियों के नहीं बैठने से पार्षदों ने भी कमेटी में आना जाना छोड़ दिया है। कभी लोगों से खचाखच भरा रहने वाला नगर परिषद भवन काम नहीं होने से पूरी तरह सुनसान पड़ा रहता है।

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डेढ़ महीने से काट रहे चक्कर

डोगरा गेट निवासी बलबीर ¨सह पिछले डेढ़ महीने से एसेसमेंट के लिए चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकारी मिलते ही नहीं। जो इक्का दुक्का कर्मचारी हैं वो गुमराह कर रहे हैं। पैसों के लिए आए दिन किसी न किसी कागज में कमी बता वापस लौटा देते हैं।

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दो महीने से नहीं हो रहे

ईओ के हस्ताक्षर

सुभाष नगर निवासी इंद्रजीत वर्मा ने बताया कि जून महीने में नक्शा पास करवाने की फाइल जमा करवाई थी। पहले एमई ने चक्कर कटवाए। अब दो महीने से ईओ के हस्ताक्षर नहीं हो रहे हैं। कभी भी जाओ या तो ईओ नहीं हैं या अभी निकले हैं, बस यही सुनने को मिलता है।

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ये कुर्सियां थी खाली

- नगर परिषद में ईओ, सचिव, दोनों एमई, भवन निरीक्षक, टैक्स इंस्पेक्टर, रेंट इंस्पेक्टर व जेई की तीन कुर्सियां खाली पड़ी थी। मुख्य तौर पर अधिकारियों की यही कुर्सियां हैं। कुर्सियों पर अधिकारी नहीं होने से जहां आमजन के काम प्रभावित हो रहे हैं, वहीं नगर परिषद को भी रोजाना लाखों रुपये आय का नुकसान हो रहा है।

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कंठ तक भ्रष्टाचार में

डूबे हैं अधिकारी

- आमजन ही नहीं जो खुद नप के अधिकारी, कर्मचारी इस बात को बयां करते हैं कि यहां के अधिकतर अधिकारी व कर्मचारी कंठ तक भ्रष्टाचार में डूबे हैं। यहां बिना दलाल के कोई काम नहीं होता। आमजन की बजाय दलालों को अधिकारियों के आने जाने का समय पहले से पता होता है। कोई भी काम करवाना है तो इन सक्रिय दलालों से मिलिए। ये अच्छी खासी रकम लेकर सही गलत सब काम करवा देते हैं।

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नगराधीश विजेंद्र हुड्डा ने कहा कि पहले भी अधिकारी नहीं होने की शिकायत मिली थी है। वह जल्द ही दौरा कर यह सुनिश्चित करेंगे कि अधिकारियों, कर्मचारियों की कमी के बावजूद लोगों को परेशानी ना हो। कम से कम जो दिन अधिकारी के लिए तय वह उस दिन सीट पर जरूर मिले।

Posted By: Jagran