कैथल बना ‘कैथ’ तो ‘कर’ तक सिमटकर रह गया करनाल, चंडीगढ़-हिसार NH के साइन बोर्ड पर बदला शहरों का नाम
चंडीगढ़-हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर NHAI के साइन बोर्डों पर शहरों के नाम अधूरे दिखाई दे रहे हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है।

कुछ इस तरह नजर आई साइन बोर्ड की तस्वीर (जागरण फोटो)
HighLights
NHAI साइन बोर्डों पर शहरों के नाम अधूरे
कैथल 'कैथ' और करनाल 'कर' बनकर रह गए
यात्रियों को मंजिल पहचानने में हो रही है परेशानी
रणबीर धानियां, कलायत। किसी शहर की पहचान केवल उसकी इमारतों, सड़कों और बाजारों से नहीं होती। उसके नाम के पीछे छिपे इतिहास, संस्कृति और गौरवशाली विरासत से भी होती है।
जब चंडीगढ़-हिसार राष्ट्रीय मार्ग पर लगे साइन बोर्डों से ही शहरों के नाम गायब होने लगे तो व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। फोरलेन मार्ग पर लगे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के साइन बोर्ड पिछले काफी समय से कुछ ऐसी ही तस्वीर पेश कर रहे हैं।
इनमें शहरों के पूरे नामों की जगह अधूरे शब्द नजर आने की शिकायत सामने आई है। हालात ऐसे हैं कि कैथल का नाम ‘कैथ’ और करनाल का नाम ‘कर’ दिखाई दे रहा है।
देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के यात्रियों को जब यहां से निकलते हुए शहरों के नाम ही सही ढंग से पढ़ने को नहीं मिलेंगे तो वे अपनी मंजिल की पहचान कैसे करेंगे? शहरों के नाम बताने के लिए लगाए गए ये साइन बोर्ड खुद पहचान के संकट से जूझते नजर आएं तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
साइन बोर्ड पर अधूरे नाम, जिम्मेदार कौन
राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे दिशा-सूचक बोर्ड यात्रियों को सही रास्ते की जानकारी देने के साथ-साथ शहरों की पहचान भी कराते हैं। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए इनका विशेष महत्व होता है।
ऐसे में बोर्डों पर शहरों के नाम स्पष्ट और सही होना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के मुताबिक, चंडीगढ़-हिसार राष्ट्रीय फोरलेन मार्ग पर लगे कुछ साइन बोर्डों की स्थिति ऐसी है कि शहरों के नाम अधूरे नजर आते हैं।
विडंबना यह है कि आधुनिक सुविधाओं और बेहतर यातायात व्यवस्था के दावों के बीच शहरों की पहचान बताने वाले बोर्ड ही अपनी जिम्मेदारी पूरी करते नजर नहीं आते। सवाल यह भी है कि नियमित निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों की नजर इन खामियों पर क्यों नहीं पड़ी और इन्हें ठीक करवाने के लिए
अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
महाभारत काल के दानवीर कर्ण की नगरी है करनाल: हरियाणा की ऐतिहासिक पहचान में करनाल का विशेष स्थान है। इसे दानवीर कर्ण की नगरी के रूप में भी जाना जाता है। महाभारत की परंपरा और लोक मान्यताओं में दानवीर कर्ण का नाम त्याग, दानशीलता और वीरता के प्रतीक के रूप में लिया जाता है।
ऐसे ऐतिहासिक महत्व वाले शहर का नाम यदि राष्ट्रीय राजमार्ग के साइन बोर्ड पर अधूरा दिखाई दे तो यह केवल लिखावट की समस्या नहीं बल्कि शहर की पहचान से जुड़ा विषय भी बन जाता है। करनाल जैसे ऐतिहासिक शहर का नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना चाहिए। ताकि यात्रियों को सही दिशा मिलने के साथ उसकी पहचान भी बनी रहे।
वीर बजरंगबली हनुमान की जन्मस्थली से जुड़ी है कैथल की पहचान: कैथल भी अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कैथल को भगवान हनुमान की जन्मस्थली माना जाता है।
कैथल स्थित प्राचीन अंजनी टीले को वीर हनुमान की जन्म स्थली माना जाता है। इस तरह कैथल की पहचान केवल एक जिला मुख्यालय या व्यापारिक केंद्र तक सीमित नहीं है। यह शहर अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है।
