कैथल, [सुनील जांगड़ा]। सीआइए-वन पुलिस ने कोलकाता से छह नेपाली युवकों और दो युवतियों को छुड़वाया है। सभी युवाओं से विदेश भेजने के नाम पर पैसे लिए गए थे। गिरोह के सदस्य इन युवकों से करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये ऐंठ चुके थे। हवाला से पैसे लिए जाते थे। गिरोह सबसे ज्यादा कोलकाता, मुंबई और दिल्ली में सक्रिय थे।

बंधक युवाओं के स्वजनों से पैसों की लगातार डिमांड की जा रही थी। इनमें कोई तीन महीने तो कोई छह महीने से बंधक था। दो युवाओं को तो दुबई भेज दिया था, लेकिन दोबारा से वापस बुलाकर बंधक बनाया गया। रिहा होने के बाद युवाओं ने कैथल पुलिस की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस नहीं आती तो वे शायद ही जिंदा रहते। युवाओं ने यह भी बताया कि बदमाश उन्हें बुरे तरीके से बंधक बनाकर रखते थे। जब मन करता मारपीट करते थे।

बंद कमरे में रखते थे और सूरत तो कभी-कभी ही दिखता था। कोलकाता में उनके तीन से चार ठिकाने थे, जहां उन्हें रात को ही ले जाया जाता था। पुलिस ने युवाओं के स्वजनों से संपर्क कर लिया है, तब तक वे कैथल पुलिस की सुरक्षा में ही रहेंगे।

एक दिन लेट होते तो फंस जाते 45 लाख रुपये

वह काम के लिए विदेश में जाना चाहता था। एक नेपाली एजेंट के जरिए उसकी दुबई जाने की बात पक्की हुई थी। 30 लाख रुपये में बात हुई थी और पहले उससे तीन लाख रुपये ले लिए थे। उसे दिल्ली बुलाया गया और वहां से उसे कोलकाता लेजाकर बंधक बना लिया गया। वहां उसे एक बंद कमरे में छोड़ दिया गया। उसके साथ मारपीट की गई और उसके 400 डालर छीन लिए। उनके पास बंदूक थी और बड़े-बड़े चाकू रखते थे। स्वजनों को फोन करवा दिया कि वह विदेश पहुंच गया है। वे बोलते थे कि अगर स्वजनों को सच्चाई बताई तो मार कर कहीं भी फेंक देंगे। बदमाशों ने स्वजनों से 45 लाख रुपये मांगे थे। अगर पुलिस एक दिन लेट हो जाती तो उसके स्वजन पैसे दे देते। कैथल पुलिस उनके लिए भगवान बनकर आई है।

--जैसा कि गांव घोराही-14 जिला डांग नेपाल निवासी सुभाष कुमार बनिया ने दैनिक जागरण को बताया।

तीन महीने दुबई रहा, फिर बुलाकर बंधक बना लिया

नेपाल के एक एजेंट के कारण वह गिरोह के कब्जे में आया था। दुबई जाने के नाम पर उसकी बात 25 लाख रुपये में हुई थी। उसने पैसे भी दे दिए थे और करीब तीन महीने पहले उसे दुबई भी भेज दिया था। वहां भी गिरोह के सदस्य सक्रिय थे। उसे दुबई में तीन महीने रखा और उसके बाद दोबारा दिल्ली लेकर आ गए। दिल्ली से उसे कोलकाता बंधक बना लिया गया। उसके स्वजनों से 35 लाख रुपये की डिमांड की गई। उसे कमरे में बंद रखा गया। सूरज कभी कभार ही दिखाई देता थ। रात को ही ठिकाने बदले जाते थे। जो भी विरोध करता उन्हें बुरी तरफ से पीटा जाता था।

--जैसा कि गांव मोहट जिला रुकुम नेपाल निवासी बर कुमार बुढा ने दैनिक जागरण को बताया।

Edited By: Anurag Shukla

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