जागरण संवाददाता, गुहला चीका (कैथल) : आठवीं कक्षा की छात्रा जेसिका चांद पर बग्घी चलाना चाहती है। उसका मून बग्घी प्रोजेक्ट खूब पसंद किया गया है। उसका चयन 'मून बग्घी प्रोजेक्ट' प्रतियोगिता के तहत नासा के समर कैंप के लिए किया गया है।

जेसिका ने बताया कि टैक मंत्रा लैब्स द्वारा 'मून बग्घी प्रोजेक्ट' पर प्रतियोगिता कराई गई थी। इसके आधार पर 'स्पेस स्टूडेंट एंबेसडर इंडिया' की हेड जसलीन जोसन ने उसका चयन जर्मनी में आयोजित होने वाले नासा समर कैंप के लिए किया था।

मून बग्गी प्रोजेक्ट आया था पसंद
जेसिका ने बताया कि उसे चांद पर जाने के लिए एक बग्घी बनाने का प्रोजेक्ट दिया गया था, जिसे आयोजकों ने खूब सराहा। चांद की ऊबड़-खाबड़ जमीन को ध्यान में रखते हुए उसने बग्घी का डिजाइन तैयार किया है। इस बग्घी के 14 गियर हैं ताकि गड्ढों से उसे आसानी से बाहर निकाला जा सके। वह हाल ही में कैंप में प्रशिक्षण लेकर भारत वापस आई है। प्रशिक्षण के दौरान भी उसके कार्य को काफी सराहा गया।

मास्को प्रशिक्षण कैंप के लिए भी हुआ चयन

जेसिका ने बताया कि जर्मनी में आयोजित कैंप में उसके कार्य को देखते हुए उसे आयोजकों ने अब 2016 में मास्को में लगने वाले दस दिवसीय विंटर वर्कशाप के लिए भी उसका चयन कर लिया है। उसने मास्को जाने की तैयारी आरंभ कर दी है। यदि यहां ठीक रहा तो नासा की तरफ से 'रीयल स्पेस सूट' गिफ्ट किया जाएगा।

प्रशिक्षण कैंप से आई नई स्फूर्ति

जेसिका ने बताया कि प्रशिक्षण कैंप से उसमें नई स्फूर्ति आई है क्योंकि कैंप में उसे न केवल मून बग्घी अलबत्ता स्पीड वर्क, टीम वर्क व अनुशासन के बारे में भी बहुत कुछ सीखने को मिला है। प्रशिक्षण के दौरान उसे स्पेस सूट पहनाया गया और उन समस्याओं से रूबरू कराया गया जो चांद पर जाने के बाद ही सामने आती हैं।

जेसिका ने कल्पना चावला के राकेट हादसे पर कहा कि राकेट में कोई कमी नहीं थी, अलबत्ता लैंड करने से ठीक पहले पेंच ढीला हो जाने के चलते राकेट का एक पार्ट खुल गया था जिससे वह हादसा हो गया। उम्मीद है कि ऐसी घटना दोबारा नहीं घटेगी।

दादा रहे प्रेरणास्रोत

यहां मदर प्राइड पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा जेसिका ने दादा अजैब सिंह को प्रेरणास्रोत बताया। पिता गुरिंद्र सिंह व माता कुलवंत कौर हर कदम पर उसके साथ हैं। बीते दिनों स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रशासन ने उसे सम्मानित किया। हालांकि इस दौरान वह जर्मनी में थी।

''अब चांद की उड़ान भरना व वहां जाकर बग्घी में घूम-घूम कर चांद के रहस्यों को उजागर करना ही उद्देश्य है। चांद पर जाकर ही दम लूंगी। उम्मीद है कि जरूर कामयाब होगी।'
-जेसिका, छात्रा

Posted By: Sunil Kumar Jha