हरियाणा प्रशासन के पीले पंजे पर भारी पड़ रहे भू-माफिया, कैथल में एक साल में कट चुकी 49 अवैध कॉलोनी
कैथल में भू-माफिया ने एक साल में 49 अवैध कॉलोनियां काटी हैं, जिनमें से 25 शहरी क्षेत्र में हैं।

कैथल में भू-माफिया ने एक साल में 49 अवैध कॉलोनियां काटी हैं (जागरण फोटो)
HighLights
कैथल में भू-माफिया ने एक साल में 49 अवैध कॉलोनियां काटीं।
डीटीपी विभाग ने 46 कॉलोनियों पर तोड़फोड़ कर केस दर्ज किए।
अन्य विभाग अवैध कॉलोनियों में कनेक्शन रोकने में विफल रहे।
सुनील जांगड़ा, कैथल। जिले भर में भू-माफियाओं की तरफ से एक के बाद एक नई अवैध कॉलोनियां काटी जा रही है। इन कालोनियों पर जिला नगर योजना विभाग (डीटीपी) की तरफ से ही कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा नगर परिषद, बिजली निगम और जन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अवैध कालोनियों में सीवरेज और बिजली के कनेक्शन भी आसानी से लिए जा रहे हैं।
जिले भर में एक साल में 49 अवैध कॉलोनियां काटी गई हैं। इनमें से करीब 25 कॉलोनी तो शहरी क्षेत्र में ही कटी हैं। यह कॉलोनियां बिना किसी विभाग से अनुमति लिए काटी गई हैं। डीटीपी विभाग की तरफ से इनमें से 46 कालोनियों में तोड़फोड़ भी की जा चुकी है। अवैध कालोनियों को लेकर 46 केस भी दर्ज किए जा चुके हैं।
भू-माफिया कृषि भूमि को सस्ते दामों में लेकर उनमें कॉलोनी काट रहे हैं। इसके बाद इन्हें महंगे दामों पर लोगों को बेचा जा रहा है। ज्यादातर कॉलोनी करनाल रोड, ढांड रोड, अंबाला रोड और जींद रोड, पूंडरी, कलायत, चीका एरिया में काटी गई हैं। अवैध कालोनियों में विभाग की तरफ से नोटिस बोर्ड भी लगाए हुए हैं ताकि यहां लोग प्लाट ना लें।
बता दें कि कुछ कालोनियों में तो नेताओं और स्वयं को समाजसेवी कहने वालों की भी हिस्सेदारी है। अवैध कालोनियों में जमीन के रेट बढ़ने के कारण लोगों की जेब भी ढीली हो रही है। अवैध कॉलोनियों में ज्यादातर प्लाट लोगों को बेचे जा चुके हैं। कुछ कालोनियों में तो लोगों ने निर्माण कार्य शुरू कर दिए हैं, लेकिन यह नियमों के विरुद्ध है। लोगों को चाहिए कि अवैध कालोनियों में प्लाट ना लें और इनमें किसी प्रकार का निर्माण कार्य ना करें।
नगर परिषद एरिया में अवैध कालोनियों पर नहीं हो रही कार्रवाई
अवैध कॉलोनी काटने पर जिला नगर योजनाकार और नगर परिषद दोनों विभागों की तरफ से कार्रवाई की जाती है। अगर कोई कॉलोनी काटी गई है तो उस पर पहले डीटीपी की कार्रवाई होती है।
सड़क निर्माण करने पर उन्हें तोड़ दिया जाता है। इसके बाद अगर अवैध कॉलोनी में मकान बना लिया जाता है और वह नगर परिषद के एरिया में है तो नप की तरफ से निर्माण कार्य पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि अभी तक नप की तरफ से इस प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। डीटीपी विभाग कई कालोनियों में कार्रवाई कर चुका है।
इन स्कीमों के तहत मिलता है लाइसेंस
सरकार की तरफ से चलाई जा रही ग्रुप हाउसिंग स्कीम, दीन दयाल हाउसिंग स्कीम और अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग स्कीम के तहत पांच एकड़ भूमि पर लाइसेंस दिया जाता है। आवेदन करने में कॉलोनी का ले आउट प्लान और राजस्व विभाग से संबंधित कागजात साथ लगाने होते हैं। पालिसी के अनुसार अवैध कालोनियों को चार श्रेणियों में बांटा गया है।
बिना अनुमति लिए कॉलोनी काटना गलत है। विभाग की तरफ से अवैध कॉलोनी काटने वालों को नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके बाद अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई भी की जाती है। अब भी अगर अवैध कॉलोनियों में निर्माण कार्य चल रहे हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग की तरफ से एक साल में ही अवैध कॉलोनी काटने को लेकर 46 केस दर्ज करवाए जा चुके हैं। -प्रवीन कुमार, जिला नगर योजनाकार अधिकारी कैथल।
