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जागरण संवाददाता, कैथल :

हरियाणा में धान की फसल की कटाई के बाद किसान पराली में आग लगाकर जमीन को बंजर करने में लगे हैं। वहीं वातावरण को भी प्रदूषित कर रहें है। जहरयुक्त खेती को लगातार जमीन में समाप्त हो रही उर्वरता शक्ति को बढ़ाने की ओर रसीना की कैलाशो देवी इस दिशा में कार्य कर रही है। ताकि लोग जहरयुक्त खेती के माध्यम से उगाई जा रही फसलों को खाकर कुपोषण का शिकार न हों।

इसी दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र कैथल के गोद लिए गए गांव रसीना ने एक नई राह दिखाई है। इसमें विशेष योगदान महिला मंडल का प्रधान कैलाशो देवी का है। उन्होंने महिलाओं को प्रेरित करके फसल अवशेष प्रबंधन में एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने अपने 14 एकड़ में गेहूं व धान की फसल काटने के बाद फसल अवशेषों में आग नहीं लगाई। बल्कि हैप्पी सीडर मशीन से गेहूं की बिजाई करके अच्छी फसल प्राप्त की। उनको देख कर गांव में अन्य किसानों ने इस तकनीक का इस्तेमाल किया। इस पहल को देखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय किसान सम्मेलन में राष्ट्रीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया। कैलाशो देवी ने बताया कि उन्हें सम्मान मिलने की खुशी है। यह सम्मान हरियाणा की महिला कृषकों का सम्मान है। उन्होंने सम्मान मिलने पर अपने गांव की महिला कृषकों व उनके परिवारों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह रसीना व आस पास के किसानों के संयुक्त प्रयासों का पुरस्कार है।

कृषि विज्ञान केंद्र के संयोजक डॉ. देवेंद्र चहल ने बताया कि गांव रसीना कृषि विज्ञान केंद्र कैथल ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए गोद लिया है। उन्होंने बताया कि कैलाशो देवी का परिवार इस कार्य में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है। इसके प्रयासों से 600 एकड़ में हैप्पी सीडर से बिजाई हुई। पराली में आग नहीं लगाई गई। डा. जसबीर सिंह ने बताया कि गांव में इस बार फसल अवशेष प्रबंधन के कारण 1200 एकड़ में किसानों ने पराली में आग नहीं लगाई। उनकी फसल की उपज में ज्यादा हुई व 20 प्रतिशत में आस पास पानी की भी बचत हुई। उन्होंने इस परिवार को पुरस्कार के लिए बधाई दी।

Posted By: Jagran

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