जागरण संवाददाता, कैथल : साहित्य सभा की ओर से रविवार को आरकेएसडी कॉलेज में नवंबर माह की गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार कमलेश शर्मा ने की। गोष्ठी में 24 नवंबर को होने वाले वार्षिक पुस्तक लोकार्पण, कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई। इस दौरान मंच संचालन, मंच सजावट, बैनर, स्मृति चिह्न, भोजन से संबंधित जिम्मेदारियां सदस्यों को बांटी गईं।

बैठक में मंच संचालन रिसाल जांगड़ा ने किया। इस दौरान गोष्ठी की शुरूआत करते हुए जीवन को लेकर दिनेश बंसल दानिश ने कहा, करने को जब काम नहीं है, फुरसत की क्यों शाम नहीं है। अंधी दौड़ है इच्छाओं की, जीवन में आराम नहीं है। रविद्र रवि ने कहा, आरजू फूल की है अगर आपको, साथ कांटों से हरदम निभाये रखो।

कुलविद्र कौर ने कहा, मैं मंदिर की जोत हूं। मैं मस्जिद का नूर हूं। न हिदू के करीब हूं, न मुसलमां से दूर हूं। प्यार को लेकर मधु शर्मा ने कहा, काश कोई ऐसा होता जो जिस्म की अपेक्षा रूह से प्यार करता। जायज-नाजायज सब कुछ भूलकर, खुलकर प्यार करता। राम मंदिर पर आए फैसले को लेकर श्याम सुंदर गौड़ ने कहा, फैसले का खुशी से इ•ाहार कीजिए। भव्य मंदिर बनेगा इंतजार कीजिए।

प्रदूषण से घिरे दिन को लेकर डॉ. तेजिद्र ने कहा, आज का दिन है रूठा-रूठा, आज का दिन रुआंसा। काला नभ नीला हो जाये, न रहे कहीं धुआं सा। गुरु नानक से जुड़े पावन स्थान करतारपुर को लेकर डॉ. हरीश झंडई ने कहा, आओ चलें तारों की छांव। करतारपुर है प्यार का जहां। गुरु नानक देव जी को पुकारते हुए रिसाल जांगड़ा ने कहा, सुनो पुकार गुरु नानक जी। लो अवतार गुरु नानक जी।

इस मौके पर प्राचार्य शमशेर सिंह कैंदल, हकीम चतरभुज बंसल, अनिल, तिलक राज, डॉ. प्रीतम दास शर्मा, स्वामी कृष्णानंद सरस्वती, कमलेश शर्मा मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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