संवाद सहयोगी, सीवन : मशरूम की खेती कर किसान मुनाफा कमा रहे हैं। सीवन क्षेत्र में काफी किसान इस परिवार से जुड़े हुए हैं। किसान खेती के साथ साथ मशरूम को सहायक फसल के रूप में अपना रहे हैं। मशरूम को उगाने का सही समय नवंबर में होता है, लेकिन इसके लिए तैयारी अभी से आरंभ हो गई है। एक कमरे में मशरूम की फसल उगाई जा सकती है। इसके लिए बैड बना कर इसमें मशरूम लगाने के लिए तुड़ी से कम्पोस्ट तैयार किया जाता है और उसके पश्चात मशरूम का बीज मिलाकर फसल तैयार की जाती है।

जिले में मशरूम के सबसे पहले उत्पादक लक्ष्मी आनन्द ने बताया कि इस समय मशरूम की खेती करने का सबसे उपयुक्त समय है। मशरूम के लिए 10 अक्टूबर से तैयारी आरंभ हो जाती है। सबसे पहले कम्पोस्ट तैयार किया जाता है। किसान इसे खुद बना सकता हैं, लेकिन उसमें समय अधिक लगता है। इसमें करीब 28 दिन का समय लगता है। दूसरे तरीके से इसे मशीनों में तैयार किया जाता है, जोकि उसमें 18 दिन में तैयार हो जाता है। इस समय अपने क्षेत्र में आस पास में पिहोवा में व भौर सहदा में यह तैयार हो रही है। किसानों ने बताया जब मशरूम में स्पान रन होता है तो 21 से 22 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है। जब मशरूम का प्रोडक्शन आरंभ होता है तो उस समय 16 डिग्री के करीब तापमान चाहिए। सीवन के प्रमुख मशरूम उत्पादक भुषण रहेजा ने बताया कि उसने पिछले वर्ष मशरूम की रिकार्ड पैदावार ली है।

कृषि विज्ञान केन्द्र कैथल ने भी मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए बहुत प्रयास किए हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के प्रयासों से समय समय पर किसानों को प्रशिक्षण के लिए हरियाणा के मुरथल व हिमाचल प्रदेश के सोलन में ले जा कर उन्हें प्रशिक्षण दिलवाया। कृषि विज्ञान केन्द्र ने समय समय पर मशरूम व्यंजन मेले का आयोजन कर लोगों में जागृति पैदा की।

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