संवाद सहयोगी, पाई : गांव करोड़ा स्थित रामनाथ के डेरे पर वीरवार को मेले का आयोजन हुआ। यहां सुबह हवन यज्ञ हुआ, इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया। डेरे के महंत खुशी नाथ ने बताया कि गांव में लगभग पिछले 700 वर्षों से भी अधिक समय से इस कार्यक्रम का आयोजन लगातार किया जा रहा है। यहां पर बाबा रामनाथ ने जिदा समाधि ली थी। उस समय से बाबा के कुंड के पास ही जमीन के नीचे समाधि बनी हुई है और उसी समय से यहां पर देशी घी की अखंड ज्योत जग रही है। उन्होंने बताया कि हुक्के को हर रोज ताजा करके भर कर रख दिया जाता है। रात्रि को बाबा के सोने के लिए बिस्तर भी बिछाया जाता है। इस कमरे में सुरंग के रास्ते जाया जाता है और शेर के मुंह के समान इसका गेट है। बाबा के कमरे में रात के समय किसी को जाने की इजाजत नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस दिन बाबा ने समाधि ली थी, उस दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी थी। जिस कारण से इस दिन प्रति वर्ष जागरण, मेले, हवन तथा भंडारे का आयोजन किया जाता है। जिसमें गांव के प्रत्येक घर श्रद्धा अनुसार समान दिया जाता है। उन्होंने बताया की यहां मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। इस अवसर पर बाबा रामफल नाथ, सोमवार नाथ, सागर नाथ सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित थे।

कैसे ली थी समाधि

डेरे के महन्त खुशी नाथ ने बताया कि इस डेरे का इतिहास बहुत पुराना है। उन्होंने बताया कि लगभग 700 वर्ष पूर्व यहां पर बाबा रामनाथ ने अपने शिष्यों के साथ नगुरां (जींद) से आकर भारी तपस्या की थी। उसके शिष्य बाद में कहीं और चले गए थे। जबकि बाबा राम नाथ ने इस स्थान पर जीवित समाधि ली थी। उन्होंने बताया कि बाबा रामनाथ ने अपने शिष्यों से जमीन में खुदाई करके गुफा बनाई थी। गुफा में बैठने के बाद बाबा रामनाथ ने अपने शिष्यों से उनके ऊपर चादर रखने को कहा। जब चादर रखने के कुछ देर बाद शिष्यों ने चादर के नीचे देखा तो बाबा रामनाथ वहां नहीं थे।

Edited By: Jagran

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