जागरण संवाददाता, कैथल : यूनाइटेड फोरम ऑफ यूनियन के बैनर तले शुक्रवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों ने कामकाज ठप रख दो दिवसीय हड़ताल शुरू की। हड़ताल होने के कारण बैंकों से लोगों को बिना कैश के ही लौटने को मजबूर होना पड़ा। वहीं एटीएम से भी लोगों को राहत नहीं मिल पाई। बैंकों की हड़ताल के बारे में लोगों को पहले कोई जानकारी न होने के कारण दूर-दराज से लेनदेन के लिए बैंकों में पहुंचे, लेकिन जब 10 बजे तक भी बैंक नहीं खुले तो लोगों की चिता बढ़ गई। लोग इधर उधर भटकते नजर आए। कर्मचारियों ने कहा कि वेतन देने के नाम पर कर्मचारियों को घाटा बताया जाता है। बड़े प्रंबधन व सरकार के साथ मिलकर उद्योगपतियों के साथ लूट का खेल खेला जाता है। इससे कर्मचारी किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। अगर सरकार ने जल्द मांगों को नहीं माना तो 11 और 12 फरवरी को हड़ताल की जाएगी अगर फिर भी मांगों को नहीं माना जाता तो 1 अप्रैल से बैंक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। करोड़ा निवासी संदीप ने बताया कि वह बैंक से कैश निकलवाने के लिए आया था, लेकिन बैंक बंद होने के कारण पैसे नहीं निकल रहे है। कर्मचारियों की ओर से पहले कोई सूचना नहीं दी इस कारण परेशानी हो रही है।

डेढ़ सौ करोड़ का लेनदेन प्रभावित

बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण करीब दो सौ करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित रहा। यूनियन के क्षेत्रिय सचिव कृष्ण मिगलानी ने बताया कि स्टेट बैंक पटियाला, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक, विजय बैंक, इलाहाबाद बैंक सहित करीब 25 बैंकों की शाखाओं के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। रोजाना इन बैंकों में डेढ़ सौ करोड़ रुपये का लेनदेन होता है।

डीसी को सौंपा ज्ञापन

यूनाइटेड फोरम ऑफ यूनियन के बैनर तले कर्मचारी कामकाज का बहिष्कार कर करनाल रोड स्थित एसबीआइ बैंक के बाहर एकत्रित हुए। जहां सरकार के खिलाफ मांगों को लेकर रोष प्रदर्शन किया। उसके बाद मांगों का ज्ञापन डीसी सुजान सिंह को सौंपा। कृष्ण मिगलानी, प्रवेश मोर, कुलदीप धारीवाल, रामपाल सिरोही, सुनील सैनी, अमित कुमार, रितु शशी मंगला, सुरेश कुमार, आदि ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को लेकर अनदेखी कर रही है, जिससे कर्मचारी हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं। वे भी उपभोक्ताओं की समस्या को समझते हैं, लेकिन सरकार बैंक कर्मचारियों को परेशान कर रही है।

ये हैं बैंक कर्मचारियों की मांग

ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 में ग्रेच्युटी सीमा राशि को समाप्त कर सेवानिवृति पर ग्रेच्युटी व अवकाश नकदीकरण की राशि को पूर्णत: आयकर मुक्त किया जाए।

-सभी बैंकों में कामगार, अधिकारी निदेशकों की नियुक्ति अविलंब की जाए।

-पेंशन संबंधित मुद्दे पूर्व सेवा निवृत सहित सभी के लिए पेंशन योजना में आरबीआइ, केंद्र सरकार की तरह सुधार किया जाए।

-एनपीएस के स्थान पर बैंकों में पूर्व में जारी पेंशन योजना लागू की जाए।

-केंद्र सरकार की तर्ज पर सरकार द्वारा स्वीकृत अनुकंपा नियुक्ति योजना लागू की जाए।

Posted By: Jagran

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