संवाद सूत्र, उचाना : पर्यूषण महापर्व के सातवें दिन प्रवचक अचल मुनि ने कहा कि क्रोध की आग को भस्मसात कर डाला, क्योंकि क्रोध आग है। क्रोध की आग बड़ी खतरनाक होती है। पता नहीं कब किसके क्रोध की आग भड़क जाए। और उस आग में परिवार की खुशियां धू-धू करके जलने लगे। इसलिए अपने घर में थोड़े से जल की व्यवस्था कीजिए। जल यानि क्षमा और सहनशीलता। सहनशील बनिए। यहां गालियों का गोबर हजम करना पड़ता है। हमेशा प्रशंसा की मिठाई नहीं मिलती। अगर ¨जदगी को शांतिमय बनाना चाहते हो तो क्रोध से किनारा करना ही पड़ेगा। अगर आप बेटे है तो ऐसा आदर्श जीवन जीएं कि दुनिया तुम्हारे मां-बाप से पूछे कि किस पुण्य के उदय से तुमने ऐसी औलाद पाई है और अगर आप बाप है तो अपने जीवन से अपने जवान बेटे को यह विश्वास दिला देना कि अब बेटे की तिजोरी की चॉबी पाने के लिए उसे बाप की मृत्यु का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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