जींद [कर्मपाल गिल]। स्कूली छात्र-छात्राओं की जिंदगी में स्मार्टफोन ने जबर्दस्त तरीके से इंट्री मारी है। खासकर 12 से 16 साल के बच्चे मोबाइल की लत के शिकार होते जा रहे हैं। बच्चों की लाइफस्टाइल बिलकुल बदल गई है। कई एेसे मामले सामने आ रहे हैं जो चौकाने वाले हैं। यहां बाल भवन में चल रहे परिवार परामर्श केंद्र में हर महीने एक-दो ऐसे केस आ रहे हैं, जिसमें बच्चे मोबाइल के एडिक्ट हो चुके हैं। कुछ बच्चे 8 से 10 घंटे मोबाइल पर ही बिताते थे। एक बच्चा पूरी रात मोबाइल पर ऑनलाइन रहता था, इसलिए दिन में स्कूल में सोता रहता था। इसका खुलासा पीटीएम में हुआ।

जिला बाल कल्याण अधिकारी अनिल मलिक कहते हैं कि लगातार काउंसिलिंग के बाद इन बच्चों की गाड़ी दोबारा ट्रैक पर आ रही है। शुरू में ऐसे बच्चों को साप्ताहिक, पाक्षिक और फिर मासिक काउंसिलिंग पर बुलाया जाता है। वह बताते हैं कि पहले मां-बाप लापरवाही बरतते हैं और बच्चे को मोबाइल दे देते हैं। बाद में जब वह एडिक्ट हो जाता है, तब मोबाइल छुड़ाने में लग जाते हैं।

परिवार परामर्श केंद्र में आए मोबाइल एडिक्शन के केस

केस 1

पिता प्राइवेट फर्म में नौकरी करते हैं। मां हाउस वाइफ हैं। 15 वर्षीय बेटे ने जन्मदिन पर मोबाइल की डिमांड की तो दोनों ने गिफ्ट कर दिया। अब बेटा अलग कमरे में सोने लगा। मां-बाप सोचते कि बेटा पढ़ता है। लंबे समय बाद दोनों पीटीएम में गए तो टीचर ने पूछा कि आप इससे क्या करवाते हैं। यह ज्यादातर समय सोता रहता है। तब पड़ताल की तो पता चला कि रात दो-तीन बजे तक ऑनलाइन रहता है। छह महीने की काउंसिलिंग के बाद अब मोबाइल देखना कम किया है।

केस 2

मियां-बीवी दोनों जॉब करते थे। दोनों के बीच अच्छी ट्यूनिंग भी नहीं थी। घर में बेटा-बेटी थे। छोटी सी बात पर कोई भी बेटे को डांट देता था। बेटे की उम्र 13 साल थी। साथियों के कहने पर उसने मम्मी-पापा से मोबाइल की डिमांड कर दी। अपने से दो क्लास सीनियर साथी से दोस्ती हो गई। उसके कहने पर इंटरनेट कनेक्शन ले लिया और पोर्नोग्राफी साइट पर विजिट करने लगा। उसका बदला व्यवहार देखकर मां-बाप की समझ में आया कि कुछ गड़बड़ है। तीन महीने तक उसकी काउंसिलिंग करवाई।

केस 3

करीब 14 साल की लड़की के दोस्तों के पास मोबाइल थे। वे अक्सर मोबाइल की बातें करते रहते थे। उसने भी अनपढ़ मां-बाप से कहा कि उसे पढ़ाई के लिए मोबाइल की जरूरत है। मोबाइल मिलने के बाद दोस्तों के कहने पर फेसबुक पर आइडी बना ली। वहां एक ढाबे वाले से दोस्ती हो गई। उससे चैटिंग होती रही। एक रात को वह घर से निकल गई और फेसबुक दोस्त उसके साथ गलत काम करके भाग गया। काउंसिलिंग के बाद अब यह बच्ची दोबारा पढ़कर अपना करियर बनाना चाहती है।

केस 4

मां-बाप का इकलौता बेटा था, इसलिए लाड़-प्यार कुछ ज्यादा ही करते थे। पहले टीवी के आगे चिपका रहता था। फिर मोबाइल की डिमांड कर दी। पहले मोबाइल पर सिर्फ गेम खेलता था। बाद में दूसरी साइट भी खोलनी शुरू कर दी। मोबाइल की ऐसी लत लग गई कि बाहर खेलना और घूमना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया। स्कूल से आने के बाद मोबाइल पर ही चिपका रहता था। इससे आंखें चिपचिपी रहने लगी। कई महीने तक लगातार काउंसिलिंग के बाद अब मोबाइल छोड़ पार्क में घूमना शुरू हुआ है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt