कर्मपाल गिल, जींद

हरियाणा पुलिस से रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर राजबीर मलिक की उम्र अब 64 साल हो चुकी है। सातवीं में पढ़ते समय बीड़ी पीने की लत लग गई थी। बड़े भाई बीड़ी पीकर फेंक देते तो उसे उठाकर पी लेते। समय के साथ यह लत बढ़ती चली गई। पुलिस में नौकरी लगने के बाद बीड़ी के साथ सिगरेट व हुक्का भी पीने लग गए। लत इतनी जबर्दस्त हो गई कि चाय पीते तो साथ में सिगरेट। खाना खाते ही बीड़ी। सोने से पहले बीड़ी और जागते ही सबसे पहले बीड़ी। दिनभर में करीब 30 से ज्यादा बीड़ी पी जाते थे। जब उम्र ढलने लगी थी बीड़ी-सिगरेट ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। गले में खराश, बलगम, खांसी की शिकायत हो गई। एक बार छोड़ी, लेकिन फिर पीने लग गए। 2007 में दांतों की समस्या लेकर डॉ. रमेश पांचाल के पास पहुंचे। मुंह का हाल देखकर डॉक्टर ने कहा कि मरने के लिए तैयार हो जाओ या धूम्रपान छोड़ दो। उसी दिन जेब से बीड़ी निकालकर तोड़ दी। अब 13 साल से सेहत फिट है। पोतों के साथ दस किलोमीटर तक सैर करने जाते हैं। मलिक कहते हैं कि जो लोग हुक्का, बीड़ी, सिगरेट पीने के आदी हैं, उन्हें छोड़ने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मन में पक्का इरादा लें और तोड़कर फेंक दें। कुछ दिन थकान व घबराहट होगी, लेकिन कुछ दिन बाद शरीर इतनी खुशी देगा कि सभी आनंद फीके लगेंगे।

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रोज पीते थे 30 बीड़ी, छोड़ी तो मिली नई जिदगी

फोटो: 30

गांव रधाना के सूरजमल कौशिक इलाहाबाद बैंक से असिस्टेंट मैनेजर के पद से रिटायर हुए हैं। करीब 15 साल तक जमकर बीड़ी-सिगरेट के कश लगाए। लत इतनी जबर्दस्त थी कि एक दिन में 30 सिगरेट पी जाते थे। इससे खांसी, बलगम की शिकायत नॉर्मल हो गई थी। सारा दिन खस खस करते रहते। थोड़ा पैदल चलते ही हांफ जाते थे। सीढि़यां चढ़ने-उतरने में भी सांस चढ़ जाते थे। ये भी दांतों की समस्या लेकर डॉ. रमेश पांचाल के पास पहुंचे। उन्होंने धूम्रपान के आगामी खतरे बताए तो अंदर से हिल गए। कौशिक कहते हैं कि सात पहले धूम्रपान छोड़ने के बाद अब खूब पैदल चल लेता हूं। जवान युवा के साथ दस किलोमीटर तक चल सकता हूं। कोई दिक्कत नहीं है। सारा शरीर फिट है। सभी तरह की बीमारियां दूर हो गई हैं। कौशिक कहते हैं सच कहूं तो जब से बीड़ी छोड़ी है, तब से नई जिदगी मिल गई है।

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कोरोना करता है फेफड़ों पर हमला, बीड़ी-सिगरेट-हुक्के से उसमें जम रहा निकोटीन

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आज विश्व धूम्रपान निषेध दिवस है। मानव शरीर पर धूम्रपान के नुकसान बताने और इससे दूर रहने के लिए इस दिन जागरूक किया जाता है। जींद जिले की बात करें तो धूम्रपान करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बीते दस सालों में महिलाओं में हुक्की पीने का प्रचलन बढ़ा है। चितित करने वाला बड़ा बदलाव यह भी आया है कि बुजुर्गों की बजाय युवा वर्ग हुक्के के कश ज्यादा खींच रहा है। हुक्का-बीड़ी-सिगरेट के कश अब कोरोना काल में ज्यादा घातक सिद्ध हो सकते हैं। इनका धुआं सीधा फेफेड़ों में जमता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है और शरीर की इम्युनिटी भी कम हो जाती है। कोरोना भी सीधा फेफड़ों पर ही अटैक करता है। दंत चिकित्सक डॉ. रमेश पांचाल कहते हैं कि मुंह व गले के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू ही है। चाहे वह हुक्का, बीड़ी, सिगरेट हो या पान, सुपारी, जर्दा व खैनी हो। कैंसर से बचने के लिए धूम्रपान को छोड़ना ही होगा।

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कई बीमारियों की जड़ है धूम्रपान: डॉ. जाटान

नागरिक अस्पताल के सीएमओ डॉ. जयभगवान जाटान ने कहा कि धूम्रपान कई बीमारियों की जड़ है। जींद जिले की जनता से अपील है कि 31 मई को मजबूत संकल्प लेकर इसे छोड़ दें। धूम्रपान छोड़ने का यह सबसे सही वक्त है, क्योंकि कोरोना व धूम्रपान का नजदीकी संबंध हैं। धूम्रपान छोड़ देंगे तो कोरोना से बचे रहेंगे। इकट्ठे बैठकर हुक्का पीने वाले भी अब इससे दूरी बनाएं।

Posted By: Jagran

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