संवाद सूत्र, सफीदों : डिडवाड़ा गांव में डिपो होल्डर ने फर्जी हस्ताक्षर कराकर मृत लोगों के लाखों रुपये का राशन हड़प करने का मामला सामने आया है। घोटाले का पर्दाफाश आरटीआइ के माध्यम से हुआ है।

सामाजिक कार्यकर्ता अनिल तुषीर ने बताया कि डिपो होल्डर ने अशिक्षित और सालों पहले मरे हुए लोगों के फर्जी हस्ताक्षर कर उनके का नाम राशन लेकर सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाया है। डिपो होल्डर ने पढ़े-लिखे लोगों का राशन अंगूठा लगाकर और अशिक्षित लोगों का राशन हस्ताक्षर कर जारी किया गया। घोटाले की सूचना 15 जनवरी को उच्च अधिकारियों, सीएम फ्लाइंग सहित प्रधानमंत्री तक को भेजी गई थी। इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

क्या है मामला

डिडवाड़ा गांव के आरटीआइ कार्यकर्ता महेंद्र ने डिपो होल्डर पालाराम पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि गांव के करीब 166 लोगों का राशन डिपो होल्डर ने फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे लगा कर हड़प कर लिया गया है। यह जानकारी उसने इकट्ठा की है। इसकी अगर जांच की जाए तो और लोगों के नाम से भी सामने आ सकता है।

महेंद्र ने बताया कि सन 1988 में मृत पांडू के नाम का राशन 2016 तक जारी किया गया था, जबकि 2015 में गांव छोड़कर जा चुके पासाराम के नाम से भी फर्जी हस्ताक्षर कर राशन दिया गया। जनवरी, 2016 में गांव में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जिनके फर्जी तौर पर अंगूठे लगाकर डिपो होल्डर राशन जारी कर रहा है। महेंद्र ने बताया कि गांव के लोगों को गैस कनेक्शन होने के नाम पर मिट्टी का तेल राशन कार्ड पर नहीं देने को कहा गया, लेकिन उनके फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे लगाकर मिट्टी का तेल जारी किया गया। उसकी अनुमानित कीमत करीब 35 लाख रुपये है। इसी प्रकार गांव के लोगों का राशन डिपो से मिलने वाली के दाल और गेहूं आदि को भी फर्जी हस्ताक्षर व अंगूठे लगा कर डिपो होल्डर ने हड़प लिया है।

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लंबी लड़ाई लड़ी महेंद्र ने

महेंद्र ने 28 दिसंबर, 2018 को जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक से डिडवाड़ा गांव के प्रत्येक राशन कार्डधारक को हर महीने कब से, कब तक राशन दिया गया। इसकी सूचना मांगी थी। उसके जवाब में 9 फरवरी, 2017 को सहायक खाद्य एवं पूर्ति अधिकारी ने जवाब दिया कि सूचना बहुत बड़ी है, इसलिए आपको 2400 पेजों के लिए 4800 रुपये देने होंगे। रुपये जमा कराने पर दी गई जानकारी से असंतुष्ट महेंद्र ने फ‌र्स्ट अपील की, लेकिन उसे वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। इसके बाद महेंद्र ने 11 सितंबर, 2018 को सेकंड अपील स्टेट इनफार्मेशन कमीशन से की। जहां से उसे 25 अक्टूबर, 2018 तक देने का वादा किया गया, लेकिन जानकारी के नाम पर उसे अस्पष्ट दिखाई देने वाले पेज मिले। इस पर महेंद्र ने जींद में विभाग के कर्मचारी को स्टेट इनफार्मेशन कमिश्नर को फोन करने की बात कही गई। जिस पर 18 नवंबर, 2018 को जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक ने एक पत्र भेजा। उसमें डिपो होल्डर की ओर से पीओएस मशीन से राशन बाटने की बात कही गई। इसका रिकॉर्ड विभाग की वेबसाइट पर देखा जा सकता है। महेंद्र के अनुसार विभाग की वेबसाइट पर कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। डिपो होल्डर पालाराम ने विभाग को दिए बयान में कहा था कि अगस्त, 2015 में चीनी आई ही नहीं, जबकि सहायक खाद्य अधिकारी (सफीदों) ने बताया कि डिपो को चीनी दी गई है। इस दौरान उसे गांव में कई बार डराया और धमकाया गया।

सहायक खाद्य एवं पूर्ति आधिकारी सतीश सेतिया ने बताया कि यह मामला काफी पुराना है। इसकी जांच एक सप्ताह में कर उच्च अधिकारियों को सौंप दी जाएगी।

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