विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

घर में एक कमरा और अच्छे कपड़े नहीं... एशियन गेम्स में इतिहास रच जींद पहुंची गोल्डन गर्ल नीरू ढांडा, नायब सरकार ने की धन वर्षा

Published: Wed, 14 Oct 2026 10:48 PM (IST)

एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग में दो गोल्ड व एक सिल्वर मेडल जीतने वाली नीरू ढांडा का पैतृक गांव संगतपुरा, ...और पढ़ें

जींद पहुंची गोल्डन गर्ल नीरू ढांडा का हुआ भव्य स्वागत। फोटो जागरण

जींद पहुंची गोल्डन गर्ल नीरू ढांडा का हुआ भव्य स्वागत। फोटो जागरण

HighLights

  1. नीरू ढांडा का जींद के संगतपुरा गांव में भव्य स्वागत।

  2. एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग में दो गोल्ड, एक सिल्वर जीता।

  3. मेडल देश व सेना को समर्पित, प्रधानमंत्री से मिलेंगी।

जागरण संवाददाता, जींद। एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग में दो गोल्ड व सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली नीरू ढांडा का बुधवार को पैतृक गांव संगतपुरा पहुंचने पर भव्य स्वागत हुआ। जींद के जयंती देवी मंदिर में माथा टेककर उन्हें विजयी जुलूस निकालकर ग्रामीण गांव लेकर गए। महिलाओं ने नीरू का दूध के साथ स्वागत किया। नीरू ने राम-राम कर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और अपना मेडल देश व सेना को समर्पित किया।

समारोह में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा, विधानसभा डिप्टी स्पीकर डा. कृष्ण मिढ़ा, राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला पहुंचे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन विदेश दौरे के चलते नहीं आ सके।

मंच पर बेटी को खिलाया चूरमा

उन्होंने अपने प्रतिनिधि के तौर रणबीर गंगवा को भेजा था। दोनों मंत्री और डिप्टी स्पीकर ने 15-15 लाख रुपये नीरू ढांडा को देने की घोषणा की। नीरू को शूटिंग में आगे बढ़ाने में मदद करने वाले मामा सोमवीर पहलवान ने 11 लाख रुपये दिए। समारोह में ढांडा खाप से जुड़े अन्य जिलों से काफी लोग पहुंचे। मां सुदेश ने मंच पर बेटी को चूरमा खिलाया।

ग्रामीणों ने गांव में खेल स्टेडियम, शूटिंग की नर्सरी बनाने की मांग की। मीडिया से बातचीत में नीरू ने कहा, मेरे गांव से पहले भी दो-तीन खिलाड़ी निकल चुके हैं। गांव के सरपंच भी खिलाड़ी रहे हैं। मेरे गांव से एक नीरू निकली है, तो दूसरी जगहों से भी और नीरू निकलेंगी। सरकार को महिलाओं की शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी मार्गदर्शन देना चाहिए।

आज प्रधानमंत्री से मिलेंगे पदक विजेता: ढांडा

शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने बताया, एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाले खिलाड़ी वीरवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इसके बाद हरियाणा सरकार की ओर से भी सभी खिलाड़ियों के सम्मान में समारोह होगा। जींद से नीरू ढांडा के साथ तीरंदाजी में गोल्ड जीतने वाली रिटौली की कीर्ति शर्मा, एयर राइफल में सिल्वर मेडल जीतने वाले डाहौला गांव के हिमांशु और कबड्डी खिलाड़ी हथवाला की पूजा भी प्रधानमंत्री से मिलेंगे।

पीएम को जींद का प्रसिद्ध बूरा, टिंडी घी व चूरमा खिलाएंगे

पिता सुरेश व मां सुदेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें 15 अक्टूबर को दिल्ली सम्मानित करने के लिए बुलाया है। वह प्रधानमंत्री के लिए भी जींद का प्रसिद्ध बूरा, टिंडी घी और देशी घी चूरमा लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा, गाम-राम चाहता है, बेटी नीरू ढांडा डीएसपी लग जाए। उनकी भी यही इच्छा है, वह डीएसपी की मां बन जाएं। किताब तो सरकार ने छाप दी है, अब डीएसपी भी बना दे।

मां बोलीं- सपने में भी नहीं सोचा था ऐसा शुभ दिन आएगा

मां सुदेश ने कहा कि खेलो इंडिया जैसी योजनाओं से उन्हें बहुत सहयोग मिला है। बाकी अभिभावकों को भी यही कहना चाहती हैं, वे अपनी बेटियों को अच्छी तरह पढ़ाएं-लिखाएं और खेलों में आगे बढ़ाएं। सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी जिंदगी में ऐसा शुभ दिन आएगा।

हरियाणा के साथ मध्य प्रदेश में भी भाजपा सरकार है। अगर वहां भाजपा सरकार नहीं होती, तो उनकी बेटी को वहां भी अभ्यास करने के लिए पर्याप्त मौके नहीं मिल पाते।

100 से ज्यादा गांवों में दिया गया था न्योता

सरपंच प्रतिनिधि सुनील ने बताया कि प्रदेश में ढांडा खाप से जुड़े 90 से ज्यादा गांवों के साथ-साथ आसपास के करीब 10 गांवों के लोगों को सम्मान समारोह का न्योता दिया गया था। समारोह में पांच हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। समारोह में खाने-पीने व अन्य व्यवस्था पूरे गांव के सहयोग से की गई थी, जिसके लिए कमेटी बनाई गई।

माता-पिता को संघर्ष करते देखा: नीरू

नीरू ने कहा कि उनके माता-पिता ही उनके सफर में प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत रहे हैं। उन्हें देख जीवन में कुछ बड़ा हासिल करने का संकल्प और मजबूत हुआ। अपने बचपन को याद कर उन्होंने कहा, वह अक्सर माता-पिता को खेतों में काम करते देखती थी।

उनके पास पहनने के लिए अच्छे कपड़े भी नहीं थे। इसके बावजूद उसे खेल के लिए सही माहौल में प्रशिक्षण का मौका मिला। माता-पिता की कड़ी मेहनत देखी तो एहसास हुआ कि उनकी जिंदगी उसकी जिंदगी से कहीं ज्यादा मुश्किल थी।

हमारे घर में सिर्फ एक कमरा है, लेकिन मेरा मानना है कि घर में एक कमरा हो या 10, अगर आपके सपने बड़े हैं तो कोई भी चीज उन सपनों को पूरा करने से नहीं रोक सकती।