संवाद सूत्र, नरवाना : श्रीरामा भारतीय कला केंद्र के तत्वावधान में रामलीला का मंचन दशरथ-कौशल्या संवाद के साथ प्रारंभ हुआ। प्रथम दिन बाबा गैबी साहब के महंत अजय गिरी महाराज ने विधिवत रूप से रामलीला का शुभारंभ किया। महंत अजय गिरी महाराज ने कहा कि राम भारतीयता के कण-कण में बसे हैं। रामलीला भारत सहित दक्षिण पूर्वी एशिया के अनेक देशो में लोकप्रिय है। राम का जीवन संपूर्ण समाज के लिए आदर्श है। उन्होंने रामायण के आदर्शों को जीवन में अपनाने पर बल दिया। रामलीला के प्रथम दिन दशरथ कौशल्या संवाद, राम जन्म व राक्षस द्वारा ऋषियों के यज्ञ में विघ्न डालना, विश्वामित्र का दशरथ के दरबार में आना को अभिनीत किया गया। रामलीला में पुत्र प्राप्ति के लिए वशिष्ठ मुनि द्वारा यज्ञ किया जाता है। दशरथ व कौशल्या की भक्ति को देखकर अग्रि देवता प्रकट होते हैं और तीनों रानियों को पुत्र रत्न प्राप्ति के लिए फल प्रदान करते हैं। सबसे सुंदर प्रसंग राम जन्म का रहा। राम जन्म पर पूरे अयोध्या में हर्षोल्लास मनाया गया। राम के साथ भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का भी भूलोक पर अवतरण हुआ। राजा दशरथ व तीनों रानियों सहित पूरी अवधपुरी हर्षित हुई। राम का जन्म पतित पावनों के उद्दार के लिए हुआ। इसके बाद विश्वामित्र को राक्षस जंगल में परेशान करते है, तो वह दशरथ के पास सहायता मांगने आते है। राजा दशरथ राम व लक्ष्मण को विश्वामित्र की सहायता के लिए जंगल भेजते है। राक्षसों द्वारा मुनियों को तंग करने का प्रकरण हास्य विनोद से भरा था। दशरथ की भूमिका मे मेहचंद पुजारी, राम की भूमिका में विशाल, लक्ष्मण रामप्रकाश, कौशल्या कुलदीप ने पात्र अभिनय किया। इस अवसर पर प्रधान भारत भूषण गर्ग, रामकुमार गोयल, डॉ. एसके सिगला, सुशील गर्ग, रामकुमार गर्ग, विशाल शर्मा, प्रमोद सिगला, राकेश शर्मा सहित कमेटी सदस्यों व काफी संख्या में दर्शक रामलीला के साक्षी बने।

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