संवाद सूत्र, जुलाना : गांव किनाना में कोरोना महामारी के चलते जो सर्वे बीएलओ ने किया और राशन के लिए जिन्हे टोकन दिए गए वो सर्वे पूरी तरह से निराधार है। गांव की महिला सरपंच सिमरजीत कौर ने आरोप लगाया है कि बीएलओ ने बिना किसी के घर जाए ही सर्वे कर दिया जिन 28 लोगों के नाम पर टोक न दिए गए हैं। उनके घर में सरकारी नौकरी भी है और साधन संपन्न हैं। जो लोग पात्र थे उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही सुविधा से महरूम ही रहना पड़ा। पंचायत समिति के सदस्य नरेश कुमार ने कहा कि गरीब और असहाय लोगों के लिए ही सरकार ने सर्वे करवाया था, लेकिन गांव के बीएलओ ने अपने घर से ही लिस्ट बनाकर प्रशासन को भेज दी। जिन लोगों के नाम के टोकन आए हैं वो किसी भी लिहाज से इस सुविधा के पात्र नही हैं। इसकी शिकायत डीसी से की गई है। ग्राम पंचायत की मांग है कि सर्वे दोबारा करवाकर असली पात्र लोगों के नाम के टोकन दिए जाएं ताकि लोग सुविधा का लाभ उठा सकें।

वर्जन

मामले की जांच की जाएगी। यह सर्वे पूरे प्रदेश में करवाया जा रहा है। कोरोना वायरस को लेकर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा असमर्थ लोगों को राशन मुहैया करवाने के लिए टोकन जारी किए जा रहे हैं। अगर बीएलओ ने गलत सर्वे किया है तो उसके खिलाफ जांच कर सख्त कार्यवाही की जाएगी।

-धर्मबीर सिंह खर्ब, बीडीपीओ जुलाना।

Posted By: Jagran

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