जागरण संवाददाता, जींद : घर जाने की चाह में शनिवार को चिलचिलाती धूप में गोहाना रोड पर सैकड़ों प्रवासी सड़क किनारे रोडवेज बस के इंतजार में खड़े रहे। कई घंटे तक धूप में ही इंतजार के बाद बस नहीं आई तो इन प्रवासियों को मायूसी के साथ वापस लौटना पड़ा।

प्रशासन द्वारा प्रवासी मजदूरों को उनके गृह क्षेत्र भेजने के लिए सुबह ही बुला लिया जाता है, लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी उनका नंबर बस में बैठने के लिए आ पाता। घर जाने की चाहत में प्रवासी लोग दिन भर भूखे-प्यासे कॉलेज के गेट के बाहर खड़े रहते हैं, ताकि बस आते ही इसमें बैठ सकें और अपने घर लौट जाएं। शनिवार को भी कॉलेज गेट के पास सैकड़ों की संख्या में प्रवासी लोग लाइन में खड़े नजर आए। प्रवासियों की जुबां पर बस एक ही बात थी, साहब हमें भी घर भिजवा दो। अब रहना मुश्किल हो रहा है। न तो सही तरीके से खाना मिल पा रहा है और न ही राशन। कहने को तो यहां खाने-पीने के बड़े-बड़े दावे हैं, लेकिन पूरे दिन में एक वक्त खाना खा कर वो कैसे गुजारा करते हैं, यह वही जानते हैं।

प्रदेश की सीमा में छोड़ दो साहब

उत्तर प्रदेश निवासी लल्लन, राजेराम, मोहनप्यारे, अजय यादव ने अपना दुखड़ा रोते हुए बताया कि वह पहले यहां मजदूरी का कार्य करते थे। लॉकडाउन के चलते अब सब काम बंद हो चुके हैं। उनके पास खाने-पीने का राशन भी नहीं बचा है। छोटे-छोटे बच्चे हैं, प्रतिदिन उन्हें दूध भी चाहिए, परिवारों को राशन भी चाहिए। भूखे मरने की नौबत आ गई है। ज्यादा नहीं तो कम से कम उन्हें उत्तर प्रदेश की सीमा में छोड़ दिया जाए, ताकि वह अपने गृह क्षेत्र पहुंच सकें।

ऑनलाइन जटिलता भी पड़ रही है भारी

जींद में रह रहे प्रवासी मजदूरों की परेशानी को देखते हुए प्रशासन द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। हेल्पलाइन नंबर 1950, 01681-246150, 01681-246151 पर कॉल कर थोड़ी सी जानकारी मुहैया करवानी होती है लेकिन इन हेल्पलाइन पर मौजूद ऑपरेटर उन्हें ऑनलाइन की जानकारी देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं और मजदूर फिर से ऑनलाइन की जटिलता में उलझ जाते हैं।

प्रशासन द्वारा किया जा रहा उचित प्रबंध

तहसीलदार मनोज अहलावत ने कहा कि प्रशासन द्वारा उचित प्रबंध किया जा रहा है। घर भेजने से पहले मेडिकल भी करवाना पड़ता है, उसके बाद जिस जिले के प्रवासी हैं, वहां बसें भेजी जाती हैं।

Posted By: Jagran

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