जागरण संवाददाता, जींद : किसान सभा, सीआइटीयू व सर्वकर्मचारी संघ के तत्वावधान में 358 दिनों से शुगर मिल के सामने चल रहे किसान लंगर पर रविवार सुबह से ही दिल्ली बार्डरों की ओर किसानों के जत्थे जा रहे हैं, जिसके कारण पूरा दिन लंगर पर भारी भीड़ रही। संसद के दोनों सदनों में कृषि कानून वापसी विधेयक-2021 पारित करने से किसानों में भारी जोश व उत्साह देखने को मिल रहा है।

लंगर की संचालन कमेटी सदस्य कपूर सिंह ने कहा कि किसानों व मजदूरों के अनथक आंदोलन के दम पर ही प्रधानमंत्री ने पूरे देश से माफी मांगनी पड़ी और काले कानूनों को संसद में वापस करने की विधेयक लाना पड़ा और बिना चर्चा व बहस के कृषि कानून वापसी बिल पास करना पड़ा। किसान आंदोलन की जीत जनता की बड़ी जीत है और आने वाले समय में और बड़े आंदोलन सरकार को देखने को मिलेंगे। किसानों की शुरू से मांग थी कि तीनों काले कानून रद्द करने के साथ एमएसपी पर फसल खरीद का कानून बनाया जाए, बिजली बिल 2020-21, पराली से संबंधित कानून, चारों लेबर कोड को रद किया जाए। देश में बेरोजगारी के कारण युवाओं में भारी निराशा देखने को मिल रही है। रोजगार को लेकर देश के युवा लगातार आंदोलन कर रहे हैं। देश-प्रदेश की सरकारें युवाओं के साथ मजाक कर रही हैं। लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। जो पैसों के बोरे रिश्वत के देते हैं, उनको नौकरी मिलती है और सरकार बड़ी बेशर्मी के साथ ईमानदारी का ढोंग करती है। निर्माण के मजदूर, मनरेगा मजदूर तथा आम जनता अपने हकों व अधिकारों को बचाने की लिए आंदोलनरत है।

लंगर पर गांव धनखड़ी के रामनिवास, छापड़ा के लीलू राम, इंद्र सिंह, राकेश खटकड़, रामा, राजन, भरत सिंह, बिजेंद्र, रामचन्द्र, पवन कुमार आदि वालंटियर के तौर पर काम कर रहे हैं।

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