जागरण संवाददाता, जींद : सर्दी का सितम सांस के रोगियों की संख्या में भी इजाफा कर रहा है। खासतौर से सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमनरी डिजीज) के मरीज अचानक काफी तेजी के साथ बढ़े हैं। पिछले में पिछले एक पखवाड़े से न्यूनतम तापमान सात डिग्री के आसपास चल रहा है। मौसम ठंडा होते ही इसका सीधा असर हृदय, अस्थि, सांस आदि विभिन्न रोगियों पर देखने को मिल रहा है। सांस के पुराने रोगी जहां अधिक परेशान हो रहे हैं, वहीं नए रोगी भी उपचार के लिए चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 80 से 90 के लगभग सांस के रोगी पहुंचते हैं। यह संख्या सर्दी बढ़ते ने कारण हुई है। इससे पहले 40-50 ऐसे रोगियों का परीक्षण किया जा रहा था। सामान्य तौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र पर इस बीमारी का हमला होता है। इन मरीजों को धूल, धुआं और सर्दी से संक्रमण के कारण फेफड़ों में आने वाली रुकावट के चलते सांस लेना भारी पड़ता है। डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला ने बताया कि तापमान गिरने से सांस के रोगियों को दिक्कत आनी शुरू हो जाती है। इस तरह के रोगी ठंड और वायु प्रदूषण से बचाव रखें।

ये बरतें सावधानी

-खांसी-जुकाम प्रभावित लोगों के संपर्क में न रहें।

-धूम्रपान और अधिक धुआं वाली जगह से परहेज करें।

-सर्दी से बचने को गर्म कपड़ों और नहाने के लिए गर्म पानी का प्रयोग करें।

-नियमित व्यायाम करें और शुद्ध वातावरण में रहें।

-हरी सब्जियों और पौष्टिक आहार का सेवन करें।

Posted By: Jagran

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