संवाद सूत्र, उचाना : व्यापार मंडल के प्रदेश सचिव रोशन लाल घोघड़ियां ने कहा कि किसान, आढ़ती का जो वर्षो पुराना रिश्ता है उसको सरकार तोड़ना चाहती है। फसल की खरीद के बाद किसानों के न चाहते हुए भी उसका रुपए खाते में डालना चाहती है। किसान, आढ़ती का चोली, दामन का साथ है। वो दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। जब किसान फसल की खरीद के बाद बैंक खाता में राशि नहीं चाहता है तो सरकार क्यों इस तरह का नियम बना कर ऐसा करने का फैसला ले रही है। वो पुरानी मंडी में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

घोघड़िया ने कहा कि आढ़ती से किसान किसी भी समय जरूरत होने पर रुपए लेकर जाते है। किसान बैंक के झंझट में नहीं पड़ना चाहते है। ऑनलाइन खरीद के बाद किसानों के खाते में रुपए आएंगे तो आढ़ती का व्यापार भी प्रभावित होगा। एक दुकान पर दो से तीन लोग काम भी करते हैं। इससे वो भी बेरोजगार हो जाएंगे। जिस तरह से कोई जमीन एक्वायर करने के लिए 80 से 100 प्रतिशत किसानों की सहमति का नियम सरकार ने बनाया है उसी तरह सरकार को चाहिए कि वो इस तरह का नियम बनाने से पहले किसानों की सहमति ले कि वो कितने प्रतिशत इससे खुश है।

Posted By: Jagran

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