जागरण संवाददाता, जींद : चौ. रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में भर्तियों के मामले में उच्चतर शिक्षा विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची और रविवार देर रात तक रिकार्ड खंगाला। वीसी प्रो. आरबी सोलंकी का रविवार को ही कार्यकाल पूरा हुआ था और वे दोपहर को विदाई लेकर विश्वविद्यालय से गए थे। जिसके बाद अचानक उच्चतर शिक्षा विभाग से जांच के लिए टीम के आने से विश्वविद्यालय स्टाफ में हड़कंप मच गया। गौरतलब है कि चौ. रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में टीचिग और नॉन टीचिग डिपार्टमेंट में भर्तियां चल रही थी। 24 जनवरी को वीसी का कार्यकाल पूरा हुआ।

गौरतलब है कि पिछले दिनों उच्चतर शिक्षा विभाग ने वीसी का कार्यकाल पूरा होने के नजदीक होने का हवाला देते हुए भर्तियां रोकने की हिदायत दी थी। जिसके बाद 20 जनवरी को कंप्यूटर साइंस एप्लीकेशन (सीएसए) के असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए लिए जाने वाले साक्षात्कार को स्थगित करते हुए भर्ती प्रक्रिया रोक दी थी। रोक के बावजूद नॉन टीचिग के कुछ पदों पर भर्ती करने करने की प्रदेश सरकार को किसी ने शिकायत कर दी। जिसके बाद रविवार को उच्चतर शिक्षा विभाग की टीम जांच के लिए विश्वविद्यालय पहुंची और देर रात तक प्रशासनिक ब्लॉक में भर्तियों से संबंधित रिकार्ड खंगालती रही। ब्लॉक में मीडिया की भी इंट्री नहीं होने दी गई। टीम ने जांच के बारे में किसी तरह की जानकारी देने से इंकार कर दिया। वहीं सीआरएसयू के रजिस्ट्रार प्रो. राजेश पूनिया ने बताया कि उच्चतर शिक्षा विभाग से टीम आई थी। लेकिन उन्होंने जांच के बारे में कोई भी जानकारी देने से इंकार कर दिया।

भर्तियों को लेकर रहा है विवाद

साल 2014 में चौ. रणबीर सिंह विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया था। टीचिग डिपार्टमेंट में 100 से ज्यादा पद हैं। जिनमें से कुछ पदों पर ही स्थाई नियुक्ति हुई है और बाकी अनुबंध पर टीचर रखे हुए हैं। नॉन टीचिग में भी अनुबंध पर कर्मचारी हैं। पिछले साल स्थाई भर्तियों की प्रक्रिया शुरू हुई थी। चयन कमेटी की मीटिग में विवाद हुआ था। जिसमें प्रो. संदीप बेरवाल ने चयन कमेटी के सदस्यों पर धांधली के आरोप लगाए। साथ ही वीसी और रजिस्ट्रार भी गंभीर आरोप लगाए थे। उसके बाद संदीप बेरवाल को चयन कमेटी के सदस्यों से दु‌र्व्यवहार के मामले में सस्पेंड कर दिया गया था।

चल रही है खींचतान

प्रो. संदीप बेरवाल के अलावा सीआरएसयू के पूर्व रजिस्ट्रार डा. राजबीर मोर भी भर्तियों को लेकर वीसी और रजिस्ट्रार पर आरोप लगाते रहे हैं। इसकी शिकायत उन्होंने राज्यपाल को भी भेजी थी। पिछले साल नौ दिसंबर को डा. मोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विश्वविद्यालय से संबंधित कुछ कागजात दिखाते हुए बड़े स्तर पर विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार होने का दावा किया था। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय की तरफ से डा. मोर पर महत्वपूर्ण कागजात चोरी करने के मामले में पुलिस को शिकायत दी थी। प्रो. बेरवाल के खिलाफ भी शिकायत दी गई है। हालांकि अभी तक मामला दर्ज नहीं हुआ है।

Indian T20 League

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

kumbh-mela-2021