मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जागरण संवाददाता, जींद : इस बार मानसून की बेरुखी के कारण जिले में सूखे जैसे हालात हैं। इसका असर फसलों पर पड़ा है। जींद ब्लॉक में 1 जुलाई से 13 सितंबर तक महज 109 एमएम तथा पिल्लूखेड़ा में 88 एमएम बारिश हुई। नरवाना में 13 सितंबर तक सबसे ज्यादा 307 एमएम बारिश हुई। वहीं उचाना, सफीदों, जुलाना व पिल्लूखेड़ा में भी कम बारिश होने से किसानों का सिचाई का खर्च बढ़ गया। बगैर बारिश के फसलों की बढ़वार भी रूक गई, जिससे इस खरीफ सीजन में उत्पादन घट सकता है। जिले में ज्यादातर क्षेत्रों में खरीफ की फसल मानसून पर निर्भर है। अच्छी बारिश होने पर उत्पादन भी ज्यादा होता है। मानसून की देरी से इस बार खरीफ फसलों की बिजाई व रोपाई में देरी हुई। जुलाई के बाद अगस्त में भी मानसून ने निराश किया। वहीं सितंबर के पहले दो सप्ताह में केवल नरवाना को छोड़ कर बाकी ब्लॉक में कहीं बारिश नहीं हुई। धान के साथ-साथ किसानों को कपास की फसल में भी सिचाई करनी पड़ रही है। वहीं बारिश नहीं होने से मौसम भी ज्यादा गर्म है। जिससे धान व कपास की फसल में बीमारियां आ रही हैं।

कहां कितनी बारिश हुई

ब्लॉक जुलाई अगस्त सितंबर अब तक

जींद -88 -21 -शून्य

नरवाना -101 -186 -20

सफीदों -52 -55 -शून्य

जुलाना -203 -90 -शून्य

उचाना -40 -79 -4

पिल्लूखेड़ा -70 -17 -1

-------------------

कपास सफेद मक्खी की चपेट में

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक यशपाल मलिक ने बताया कि बारिश कम होने से फसलों में बीमारियां आने लगी हैं। कपास की फसल में सफेद मक्खी व चूरड़ा का असर बढ़ गया है। गन्ने की लंबाई कम हुई। कपास की भी बढ़वार नहीं हो सकी। धूप तेज होने से धान की फसल में भी नुकसान है। जुलाना, महम, मुंढाल, बरवाला, उचाना से जींद की तरफ के एरिया में भूमिगत पानी खारा है। फसल को बचाने के लिए किसानों को डीजल फूंक कर सिचाई करनी पड़ रही है। जिससे लागत काफी बढ़ गई है। शनिवार को कुछ बारिश की उम्मीद है। लेकिन आगे होने वाली बारिश कपास, धान, बाजरे के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप