शहरनामा:

शहर में एक नेता जी का दरबार आजकल खूब चर्चा में चल रहा है। चर्चा हो भी क्यों न। नेता जी के पास जो भी शिकायत लेकर जाता है, वो तुरंत उनके सामने ही समस्या को लेकर संबंधित अधिकारी को फोन घुमा देते हैं। यहीं कारण है कि नेता जी के दरबार में फरियादें तो हजारों हो गई हैं। मगर निदान बहुत कम ही शिकायतों का हुआ है। जब शिकायतों का समाधान नहीं हो पाता है तो नेता जी शिकायतकर्ताओं को एक ही जवाब देते हैं कि उनकी तो सरकार ही नहीं है। अब शिकायतकर्ता भी यह जवाब सुन-सुनकर परेशान हो गए हैं। मगर वो करें भी क्या। अब उनकी समस्याओं का समाधान करने वाला भी इस शहर में कोई दूसरा जो नहीं है।

नेता भी भूले, मगर युवराज होंगे अब कार्यकर्ताओं के बीच:

देश की राजधानी से कार्यकर्ताओं के बल पर जनता के आशीर्वाद से सीधा प्रदेश की राजधानी तक पहुंचे नेता जी इन दिनों कार्यकर्ताओं को पूरी तरह भूल गए हैं। दो माह के बाद भी उन्हें अपने मेहनती कार्यकर्ताओं की याद नहीं आ रही है। करीब एक माह पहले धन्यवादी दौरा शुरू करने वाले नेता जनता का आभार जताना भी भूल गए हैं। उनकी इस भूल पर पर्दा डालने के लिए अब आलाकमान के राजकुमार को ही कार्यकर्ताओं के बीच आना पड़ रहा है। चर्चा यह भी है कि नेता जी के कर्मठ कार्यकर्ता भी अब राजकुमार के कानों को भरने के लिए तैयार बैठे हैं। हालांकि राजकुमार के कानों में फुसियाने से कुछ होने वाला नहीं है लेकिन ये कार्यकर्ता अपना बोझ जरूर हल्का कर सकते हैं।

ना जनप्रतिनिधि और ना ही कोई पद, फिर भी अधिकारी ठोक रहे सेल्यूट:

शहर में एक नेता का मोह नगर परिषद से नहीं छूट रहा है। नगर परिषद के कार्यालय से शुरू हुई इस नेता की राजनीति लगता है नगर परिषद तक ही सीमित होकर रह गई है। ये नेता ना तो इस समय जनप्रतिनिधि हैं और ना ही कोई पद, मगर नेता जी का रौब अब भी इतना है कि कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक उन्हें सेल्यूट ठोंक रहे हैं। हालांकि नेता जी कुर्सी पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं लेकिन यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि नेता जी को कुर्सी मिलती है या नहीं। मगर नेता जी कुर्सी के लिए चक्कर खूब काट रहे हैं। जमानत तक बचा नहीं पाए और देने लगे दूसरों को दोष:

इधर, एक पार्टी में अपने आप को सूरमा कहने वाले नेता की ऑडियो भी खूब वायरल हो रही है। खुद तो जमानत तक नहीं बचा पाए और अब ये नेता दूसरों को दोष देने पर लगे हैं। वायरल ऑडियो में नेता जी पार्टी के एक नेता को कह रहे हैं उन्होंने इतना बड़ा पद दिलवाया और वे उन्हें वोट तक नहीं दिलवा पाए तो ऐसे में दूसरी तरफ के नेता भी खूब खरी-खरी सुना रहे हैं।

प्रस्तुति, कृष्ण वशिष्ठ

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