जागरण संवाददाता, झज्जर : सूबे में पशुओं पर कुछ जगह लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप देखा गया है। ऐसे में जिला के किसान अपने पशुओं की देखभाल में सावधानी बरतें। यह एक संक्रामक बीमारी है। पशु में इस बीमारी के लक्षण दिखें तो पशुओं को एहतियात के तौर पर एक दूसरे से दूर रखना जरूरी है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के जिला झज्जर के डिप्टी डायरेक्टर डा. मनीष डबास ने बताया कि लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) गोजातीय पशुओं में चमड़ी का रोग है जो लम्पी स्किन डिजीज वायरस के कारण होता है। उन्होंने पशुपालकों से अपील करते हुए कहा है कि पशुपालक रोग प्रभावित क्षेत्र से पशु ना खरीदें। यह गोवंश और भैंसों को प्रभावित करने वाली एक संक्रामक, छूत और आर्थिक महत्व की बीमारी है। यह चमड़ी और शरीर के अन्य भागों में गांठ बनने के उपरान्त फटने से बने घावों के कारण कभी-कभी घातक भी हो सकती है। आमतौर पर, बुखार, भूख न लगना, और मुंह, नाक, थन, जननांग, मलाशय की त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली पर गांठे बनना, दूध उत्पादन में कमी, गर्भपात, बांझपन और कभी-कभी मृत्यु इस रोग की नैदानिक अभिव्यक्तियां हैं । द्वितीयक जीवाणु संक्रमण होने से प्रभावित पशुओं की स्थिति और खराब हो जाती है। पीड़ित पशु के शरीर पर गांठे बनने के कारण इस रोग को गांठदार या ढेलेदार चमड़ी रोग भी कहा जाता है।

डा. डबास ने बताया कि एलएसडी प्रभावित किसी भी पशु में लम्पी स्किन डिजीज होने पर अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से ईलाज करवाएं। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग करें और घावों के उपचार एवं मक्खियों को दूर करने के लिए कीट विकर्षक/एंटीसेप्टिक दवा लगाएं।

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