हड्डियों को अंदर से खोखला कर रही हैं 'साइलेंट किलर' बीमारी, इन 5 प्वाइंट्स में करें बचाव
आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राकेश गर्ग ने ऑस्टियोपोरोसिस को 'साइलेंट किलर' बताते हुए हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर जोर ...और पढ़ें

हड्डियों को अंदर से खोखला कर रही हैं 'साइलेंट किलर' (फाइल फोटो)
HighLights
ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों को कमजोर करने वाली खामोश बीमारी है।
कैल्शियम व विटामिन डी युक्त आहार हड्डियों के लिए जरूरी।
नियमित व्यायाम और बोन डेंसिटी टेस्ट बचाव के उपाय।
जागरण संवाददाता, झज्जर। एक सशक्त और खुशहाल जीवन की नींव हमारी मजबूत हड्डियों पर टिकी है। हर साल 20 अक्टूबर को पूरी दुनिया में ''विश्व आस्टियोपोरोसिस दिवस'' मनाया जाता है।
विशेष दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस में हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही आस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम, इसके जल्द निदान और सही उपचार के बारे में लोगों को शिक्षित करना है।
आधुनिक दौर में बदलती जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान के कारण यह बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है, जिससे समय रहते सतर्क होना बेहद आवश्यक हो गया है।
''साइलेंट किलर'' की तरह कमजोर करती है हड्डियां
ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं अध्यक्ष आइएमए डॉ. राकेश गर्ग ने बताया कि आस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक ऐसी खामोश बीमारी है, जिसमें हड्डियों का घनत्व तेजी से कम होने लगता है।
इसके कारण हड्डियां अंदर से खोखली, कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं। स्थिति इतनी नाजुक हो जाती है कि मामूली सी फिसलन, हल्का सा झटका लगने या फिर झुकने मात्र से ही रीढ़ की हड्डी, कूल्हे या कलाई की हड्डी टूटने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शुरुआती दौर में इसके कोई स्पष्ट लक्षण या दर्द महसूस नहीं होते, इसलिए मरीज को तब तक इसका अहसास नहीं होता जब तक कि कोई हड्डी टूट न जाए।
महिलाओं और बुजुर्गों को अधिक जोखिम
डॉ. राकेश गर्ग के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का कमजोर होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन महिलाओं में मेनोपाज (मासिक धर्म बंद होने) के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से हड्डियों का क्षरण तेजी से होता है। इसके अलावा धूप में कम निकलना, शारीरिक व्यायाम का अभाव, चाय-काफी का अत्यधिक सेवन और धूम्रपान भी इस बीमारी के मुख्य कारकों में शामिल हैं।
बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
पोषक तत्वों से भरपूर आहार: अपने दैनिक भोजन में कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे दूध, दही, पनीर, छाछ, हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित अनाज अवश्य शामिल करें।
विटामिन डी और धूप का सेवन: शरीर में कैल्शियम के अवशोषण के लिए विटामिन डी बेहद जरूरी है। इसके लिए प्रतिदिन सुबह 15 से 20 मिनट गुनगुनी धूप में जरूर बैठें।
नियमित व्यायाम और योग: शारीरिक रूप से सक्रिय रहना हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में मदद करता है। पैदल चलना, हल्का-फुल्का व्यायाम और योग रोजाना की दिनचर्या में शामिल करें।
समय पर जांच: 45 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों व महिलाओं को तथा किसी भी प्रकार के हड्डियों या जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीजों को डॉक्टर की सलाह से बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।
