विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

झज्जर में गाड़ी खड़ी करना बना बड़ी समस्या, पार्किंग की जगह नहीं; थाने के बाहर लगा रहता है गाड़ियों का झुंड

Published: Sat, 19 Sep 2026 01:58 PM (IST)

झज्जर में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण पार्किंग की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है, जिससे शहर में लगातार जाम लग रहा है।

झज्जर: पार्किंग के तय किए गए स्थान की स्थिति। यहां पर सीमित वाहन ही खड़े हो पा रहे हैं। जबकि, परिसर में मलबा आदि डाल दिया गया है। जागरण

झज्जर: पार्किंग के तय किए गए स्थान की स्थिति। यहां पर सीमित वाहन ही खड़े हो पा रहे हैं। जबकि, परिसर में मलबा आदि डाल दिया गया है। जागरण


HighLights

  1. झज्जर में वाहनों की संख्या बढ़ने से पार्किंग की समस्या गंभीर हुई

  2. पुलिस थाने के बाहर बेतरतीब वाहनों से दिनभर जाम

  3. पुराना बस स्टैंड मलबे से भरा, पार्किंग की जगह नहीं

जागरण संवाददाता, झज्जर। शहर में आबादी के अनुपात में जिस तेजी से गाड़ियों की संख्या बढ़ी है, पार्किंग का ठिकाना उतनी ही तेजी से गायब हुआ है।

आज झज्जर के हालात यह हैं कि घर से गाड़ी लेकर निकलना और बाजार में खरीदारी के दौरान उसे सुरक्षित खड़ा करना आम आदमी के लिए किसी कठिन पहेली से कम नहीं रह गया है। लोग हर स्तर पर परेशान हैं, लेकिन व्यवस्था दुरुस्त करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। और ना ही यह उनकी प्राथमिकता में दिख रहा है। जिसका खामियाजा प्राय: शहर में हर व्यक्ति को उठाना पड़ रहा है।

थाने के बाहर ही लग रहा जाम, खुद की चौखट पर बेफिक्र प्रशासन

व्यवस्था का सबसे बेजोड़ उदाहरण देखना हो तो शहर के पुलिस स्टेशन के बाहर चले आइए। जिस पुलिस पर पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने की जिम्मेदारी है, उसी थाने के ठीक सामने पूरा दिन गाड़ियां बेतरतीब ढंग से खड़ी रहती हैं। वहां पूरे दिन वाहन घिसट-घिसट कर निकलते हैं और जाम की स्थिति बनी रहती है। जबकि, पुलिस की टीम सड़कों पर घूम-घूम कर चालान की कार्रवाई में जुटी दिखती है।

चालान का खौफ, लेकिन पार्किंग की जगह नदारद

खरीदारी के व्यस्त घंटों में वाहन चालकों का तनाव और बढ़ जाता है। जब पुलिस की टीमें केवल इस ताक में रहती हैं कि कहां सड़क किनारे कोई गाड़ी दिखे और तुरंत चालान काटा जाए, उस समय लोग खासे परेशान रहते हैं। सवाल यह है कि जब शहर में कहीं वैध पार्किंग की व्यवस्था ही नहीं बनाई गई है, तो लोग अपनी गाड़ियां कहां खड़ी करें?

पुराना बस स्टैंड बना 'मलबा पार्क', पत्र-पत्र का खेल जारी

पुराने बस स्टैंड की खाली जमीन को करीब 32 हजार रुपये प्रतिमाह के ठेके पर दिए जाने के बावजूद वहां गाड़ियों की जगह आसपास की गलियों का मलबा भरा पड़ा है।

अधिकारी एक-दूसरे के दफ्तरों में पत्र भेजकर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर रहे हैं। जब तक कागजों में पार्किंग की जगह तलाशी जा रही है, तब तक झज्जर की जनता रोजाना जाम में फंसने, चालान का डर झेलने और पार्किंग की पहेली सुलझाने को मजबूर है।

शहर यातायात प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पार्किंग की समस्या को लेकर अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। उनके अनुसार शहर में जगह की कमी के चलते कई स्थानों पर वाहन बेतरतीब तरीके से खड़े हो जाते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। उनके चालान काटे जा रहे हैं।

नगर परिषद के ईओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि पार्किंग के लिए जगह उपलब्ध कराने के संबंध में डीएमसी को पत्र भेजा गया है। जगह मिलने के बाद पार्किंग की व्यवस्था की जा सकती है।

कर्मबीर सिंह का कहना है कि जब वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है तो पार्किंग की जरूरत के अनुसार स्थान क्यों नहीं विकसित किए जा रहे। पुराना बस स्टैंड की उपलब्ध जमीन समेत अन्य संभावित स्थानों को चिह्नित कर व्यवस्थित पार्किंग विकसित की जाए तो बाजारों की सड़कों से वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है।

सुरजीत सिंह का कहना है लोग सड़क पर वाहन खड़े करते हैं। पुराना बस स्टैंड में तो गलियों का मलबा डाला गया है। सड़कों पर वाहन खड़े होने के साथ पैदल राहगीरों के लिए सुरक्षित रास्ता और बाजारों में सुचारु यातायात की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा सकती है।